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ऑपरेशन सिन्दूर बहस से बाहर किए जाने के बाद कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने पार्टी पर कसा तंज, सोशल मीडिया पर शेयर किया पोस्ट

तिवारी ने 1970 की फिल्म 'पूरब और पश्चिम' के गीत 'है प्रीत जहां की रीत सदा' के बोल लिखकर अपनी देशभक्ति जताई. ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी नीति को वैश्विक मंच पर ले जाने के लिए सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल बनाए.

Calendar Last Updated : 29 July 2025, 11:21 AM IST
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Manish Tewari: कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने ऑपरेशन सिंदूर पर लोकसभा बहस में वक्ताओं की सूची से खुद और शशि थरूर को बाहर रखे जाने का विरोध करते हुए अपनी पार्टी पर तंज कसा. आनंदपुर साहिब से सांसद तिवारी ने सोशल मीडिया पर एक समाचार लेख का स्क्रीनशॉट साझा किया. इसमें बताया गया कि उन्हें और थरूर को बहस में बोलने का मौका नहीं दिया गया. 

तिवारी ने 1970 की फिल्म 'पूरब और पश्चिम' के गीत 'है प्रीत जहां की रीत सदा' के बोल लिखकर अपनी देशभक्ति जताई. ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी नीति को वैश्विक मंच पर ले जाने के लिए सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल बनाए. मनीष तिवारी और शशि थरूर इनमें शामिल थे. इन समूहों ने कई देशों का दौरा कर सीमा पार आतंकवाद और पाकिस्तान के समर्थन को उजागर किया. थरूर ने एक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व भी किया. इन दौरों का मकसद भारत की शून्य सहनशीलता की नीति को दुनिया के सामने रखना था.

तिवारी का बोलने का अनुरोध

समाचार एजेंसी एएनआई के सूत्रों के अनुसार, मनीष तिवारी ने लोकसभा बहस में बोलने के लिए कांग्रेस नेतृत्व से अनुरोध किया था. हालांकि, उनकी मांग को नजरअंदाज किया गया. तिवारी ने अपनी नाराजगी सोशल मीडिया पर जाहिर की. उन्होंने देशभक्ति का संदेश देते हुए कहा कि वह भारत की बात हमेशा उठाते रहेंगे. तिवारी का यह कदम पार्टी के भीतर मतभेदों को उजागर करता है. कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने ऑपरेशन सिंदूर की आलोचना करने वाली पार्टी लाइन से दूरी बनाई. सूत्रों के अनुसार, पार्टी नेतृत्व ने उनसे लोकसभा बहस में हिस्सा लेने का अनुरोध किया था. थरूर ने इनकार करते हुए कहा कि वह ऑपरेशन को सफल मानते हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर उन्हें बोलने का मौका मिला, तो वे यही रुख दोहराएँगे. पत्रकारों के सवाल पर थरूर ने हल्के अंदाज में कहा, 'मौनव्रत, मौनव्रत.' उनका यह रवैया पार्टी के कड़े रुख से अलग है.

कांग्रेस के भीतर मतभेद?

थरूर और तिवारी का बहस से बाहर रहना कांग्रेस के भीतर मतभेदों को दर्शाता है. पार्टी ने ऑपरेशन सिंदूर की आलोचना करने की रणनीति बनाई थी, लेकिन थरूर ने इसे सही ठहराया. तिवारी ने भी अपनी नाराजगी जाहिर की. यह स्थिति पार्टी नेतृत्व के लिए चुनौती बन सकती है. दोनों नेताओं का प्रतिनिधिमंडल में शामिल होना और फिर बहस से बाहर रहना चर्चा का विषय बना हुआ है. ऑपरेशन सिंदूर पर लोकसभा में चर्चा ने भारत की आतंकवाद के खिलाफ नीति को मजबूत किया. तिवारी और थरूर जैसे नेताओं का रुख सरकार और विपक्ष के बीच एकजुटता की जरूरत को दर्शाता है.

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