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वंदे मातरम के 150 साल होने पर संसद में शुरू होगी ऐतिहासिक बहस, PM मोदी करेंगे शुरुआत

लोकसभा में सोमवार को पीएम मोदी भाषण देंगे. मंगलवार को राज्यसभा में गृह मंत्री अमित शाह चर्चा शुरू करेंगे. विपक्ष की ओर से कांग्रेस के गौरव गोगोई (लोकसभा) और मल्लिकार्जुन खड़गे (राज्यसभा) मुख्य वक्ता होंगे.

Calendar Last Updated : 08 December 2025, 09:17 AM IST
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संसद के शीतकालीन सत्र के दूसरे सप्ताह में सोमवार को बड़ा आयोजन होने जा रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोकसभा में वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने पर विशेष बहस की शुरुआत करेंगे. यह चर्चा पूरे आठ घंटे चलेगी.

बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने यह गीत लिखा था. पहली बार इसे जदुनाथ भट्टाचार्य ने गाया. यह गीत 1875 में लिखा गया था. अब इसके 150 साल पूरे हो रहे हैं. पूरे देश में साल भर यह जश्न मनाया जाएगा. इसका मकसद युवाओं को देशभक्ति की भावना से जोड़ना है.

दोनों सदनों में प्रमुख वक्ता

लोकसभा में सोमवार को पीएम मोदी भाषण देंगे. मंगलवार को राज्यसभा में गृह मंत्री अमित शाह चर्चा शुरू करेंगे. विपक्ष की ओर से कांग्रेस के गौरव गोगोई (लोकसभा) और मल्लिकार्जुन खड़गे (राज्यसभा) मुख्य वक्ता होंगे. तृणमूल कांग्रेस ने बंगाल से जुड़े सांसदों को मौका दिया है. लोकसभा में महुआ मोइत्रा और काकोली घोष दस्तीदार बोलेंगी. राज्यसभा में सुखेंदु शेखर रॉय और रीताब्रत बनर्जी भाषण देंगे. एक वरिष्ठ टीएमसी नेता ने कहा कि बंगाल से जुड़ा यह गीत है, इसलिए बंगाल के सांसद इसे और मजबूती से रखेंगे.”

चुनाव सुधारों पर भी होगी बहस

लोकसभा में मंगलवार को चुनाव सुधारों पर बड़ी बहस होगी. इसमें वोटर लिस्ट का विशेष संशोधन अभियान भी शामिल होगा. विपक्ष के नेता राहुल गांधी इस मुद्दे पर बोलेंगे. बुधवार को राज्यसभा में यह चर्चा जारी रहेगी. पिछले सप्ताह दोनों पक्षों में दो दिन तक गतिरोध रहा था. लेकिन अब सहमति बन गई है. संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बताया कि 8 दिसंबर दोपहर 12 बजे से वंदे मातरम पर और 9 दिसंबर को चुनाव सुधारों पर चर्चा होगी.

पीएम मोदी ने हाल ही में कांग्रेस पर हमला बोला था. उन्होंने कहा था कि 1937 में कांग्रेस ने वंदे मातरम की कुछ पंक्तियों को हटाने की कोशिश की थी. इससे देश के बंटवारे के बीज बोए गए. 7 नवंबर को पीएम ने ही इस गीत के 150वें साल के उत्सव की शुरुआत की थी. सरकार का कहना है कि इस गीत की ताकत युवाओं तक पहुंचनी चाहिए. स्कूल-कॉलेजों में कार्यक्रम होंगे. देशभर में जागरूकता अभियान चलेगा. संसद में होने वाली यह बहस उसी कड़ी का हिस्सा है.

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