menu-icon
The Bharatvarsh News

अमेरिकी विदेश नीति पर उठे सवाल, तीन दिन में पीएम मोदी को लेकर बदला ट्रंप का बयान, भारत-अमेरिका रिश्तों पर बढ़ी उलझन

भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अमेरिका की विदेश नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि अमेरिका कि सरकार और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच मतों का विरोधाभास देखने को मिलता है.

Calendar Last Updated : 09 January 2026, 02:55 PM IST
Share:

नई दिल्ली: भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर पहले ही अमेरिकी विदेश नीति को लेकर अपनी राय साफ कर चुके हैं. उन्होंने कहा था कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दुनिया और यहां तक कि अपने सहयोगी देशों से भी सौदे करने का तरीका खुलकर और अलग अंदाज में अपनाते हैं. जयशंकर का कहना था कि विदेश नीति आमतौर पर इस तरह सार्वजनिक नहीं होती, लेकिन ट्रंप हर बात खुले मंच पर कह देते हैं. हाल की घटनाओं में यह बात सही साबित होती नजर आ रही है. कई मौके पर ट्रंप और उनकी सरकार के का मत विरोधाभास रहा है. 

पिछले कुछ दिनों में भारत को लेकर ट्रंप के बयान काफी सख्त रहे हैं. 6 जनवरी 2026 को ट्रंप ने एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपने रिश्तों का जिक्र किया. उन्होंने दावा किया कि भारत पर कड़े टैरिफ लगाने के बाद पीएम मोदी ने उन्हें फोन किया और बहुत सम्मान के साथ बातचीत की. ट्रंप ने यहां तक कहा कि मोदी ने उनसे पूछा था कि 'सर, क्या मैं आ सकता हूं?'.

अमेरिकी अधिकारी के बयान पर खड़े हुए सवाल 

ट्रंप के इस बयान का मकसद यह दिखाना था कि उनकी टैरिफ नीति बेहद असरदार है और बड़े नेता उनके दबाव में बातचीत के लिए तैयार हो जाते हैं. लेकिन कुछ ही दिनों में उनका यह दावा खोखला नजर आने लगा, क्योंकि उनकी ही सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी के बयान ने इस दावे पर सवाल खड़े कर दिए.

'मोदी ने नहीं किया कॉल' अमेरिकी सचिव हावर्ड लुटनिक

9 जनवरी को अमेरिकी वाणिज्य सचिव हावर्ड लुटनिक ने एक पॉडकास्ट में अलग ही तस्वीर पेश की. लुटनिक ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच एक बड़ा व्यापार समझौता लगभग तय हो चुका था, लेकिन वह इसलिए टूट गया क्योंकि पीएम मोदी ने राष्ट्रपति ट्रंप को फोन नहीं किया.

लुटनिक के मुताबिक, सौदे को अंतिम रूप देने के लिए मोदी का ट्रंप से बात करना जरूरी था, लेकिन भारतीय पक्ष इसके लिए सहज नहीं था. उन्होंने कहा कि भारत ने देरी की और अब अमेरिका इंडोनेशिया और वियतनाम जैसे देशों के साथ व्यापार समझौते कर चुका है.

अमेरिकी विदेश नीति में भ्रम क्यों

इन विरोधाभासी बयानों की वजह समझना मुश्किल नहीं है. ट्रंप अक्सर विदेशी नेताओं के साथ अपने निजी रिश्तों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करते हैं ताकि घरेलू राजनीति में खुद को मजबूत नेता दिखा सकें. वहीं, उनकी टीम के अधिकारी ज्यादा व्यावहारिक और लेन-देन की भाषा में बात करते हैं. लुटनिक के बयान से साफ होता है कि ट्रंप प्रशासन व्यापार में “पहले आओ, पहले पाओ” जैसी नीति अपनाता है. जो देश जल्दी समझौता करता है, उसे बेहतर शर्तें मिलती हैं, और जो देरी करता है, उस पर दबाव और टैरिफ बढ़ते हैं.

अमेरिका चाहता है कि पीएम मोदी खुद पहल करें और सीधे फोन कर समझौता करें, लेकिन भारत दबाव में आकर फैसले लेने के मूड में नहीं है. सूत्रों के मुताबिक, भारत ने साफ कर दिया है कि वह अपनी शर्तों पर ही किसी डील करेगा.

सम्बंधित खबर

Recent News