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पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने दुनिया को कहा अलविदा! 92 वर्ष की आयु में निधन

भारत की अर्थव्यवस्था को उन्होंने अपनी मेहनत से तेज गति दी थी. प्रधानमंत्री बनने से पहले उन्होंने पहले वित्त मंत्री के रुप में काम किया और आजाद भारत को विकास की गति दी. 

Calendar Last Updated : 27 December 2024, 06:37 AM IST
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Manmohan Singh: देश के पहले सिख प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का गुरुवार रात नई दिल्ली में निधन हो गया. सिंह ने 92 साल की उम्र में उन्होंने अंतिम सांस ली. महान अर्थशास्त्री सिंह बढ़ती उम्र के कारण कई बीमारियों से ग्रसित हो चुके थे. भारत की अर्थव्यवस्था को उन्होंने अपनी मेहनत से तेज गति दी थी. प्रधानमंत्री बनने से पहले उन्होंने पहले वित्त मंत्री के रुप में काम किया और आजाद भारत को विकास की गति दी. 

मनमोहन सिंह को भारत के महान विद्वानों के रुप में हमेशा जाना जाएगा. उन्होंने भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर के रूप में भी देश के लिए सेवा की है.देश के 14वें प्रधानमंत्री के परिवार में उनकी पत्नी गुरशरण कौर और तीन बेटियां दमन सिंह, उपिंदर सिंह और अमृत सिंह हैं. 

पीएम मोदी ने जताया शोक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मनमोहन सिंह के निधन पर सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर करते हुए लिखा कि मनमोहन सिंह जी ने अपार बुद्धिमत्ता और ईमानदारी के साथ भारत का नेतृत्व किया. उनकी विनम्रता और अर्थशास्त्र की गहरी समझ ने राष्ट्र को प्रेरित किया.मैंने एक मार्गदर्शक खो दिया है. दुनिया भर में लाखों लोग उनके प्रशंसक थे, जो उन्हें अत्यंत गर्व के साथ याद करेंगे. 

दुनिया भर में सम्मान

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि बेहद दुख के साथ हम भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के निधन की सूचना दे रहे हैं. उन्हें रात 8.06 बजे अस्पताल में भर्ती कराया गया और रात 9.51 बजे मृत घोषित कर दिया गया. भारत के सबसे विद्वान राजनीतिक विचारकों में गिने जाने वाले सिंह को उनकी अकादमिक कुशाग्रता के लिए दुनिया भर में सम्मान दिया जाता था और उन्होंने असंख्य प्रशंसाएँ प्राप्त कीं.

मनमोहन सिंह का ऐतिहासिक कार्यकाल

2004 से 2014 के बीच प्रधानमंत्री के रूप में उन्होंने कई सामाजिक सुरक्षा योजनाएँ शुरू कीं. जिससे ग्रामीण मज़दूरी बढ़ी और हाशिए पर पड़े समुदायों को सहारा मिला. 2008 में भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौते को आगे बढ़ाने के लिए अपनी ज़मीन पर डटे रहे. जिसने दुनिया के दो महान लोकतंत्रों के बीच घनिष्ठ संबंधों को दर्शाया और 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट से निपटने के लिए वैश्विक प्रशंसा प्राप्त की. लेकिन उनके कार्यकाल का दूसरा भाग भ्रष्टाचार के आरोपों, नीतिगत पक्षाघात और उनकी सरकार के अंदर गहरे मतभेदों से भरा रहा. जिसने उनकी विरासत को कलंकित किया और उन्हें यह कहने के लिए प्रेरित किया कि इतिहास उनके प्रति दयालु होगा. 

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