Courtesy: AI Generated
नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ईरान के साथ एक महत्वपूर्ण समझौते की घोषणा की थी. लेकिन तेहरान ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है. ईरान ने स्पष्ट किया है कि दोनों देशों के बीच अभी तक कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ है और यह खबरें महज अटकलें हैं.
रेड लाइन्स पर नहीं झुकेंगे
ईरानी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि वह अपनी राष्ट्रीय संप्रभुता और रेड लाइन्स पर किसी भी कीमत पर झुकने को तैयार नहीं है. इसके साथ ही, ईरान ने हाल के दिनों में अमेरिकी हमलों की निंदा की है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वे अमेरिका को जवाबदेह ठहराएं.
इस्माइल बघई ने क्या कहा
ईरानी सरकारी समाचार एजेंसी IRNA के मुताबिक, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघई ने कहा कि शांति वार्ता की स्थिति शुरू से ही स्पष्ट थी. उन्होंने बताया कि समझौते का मसौदा तैयार किया जा चुका था, लेकिन अमेरिकी पक्ष लगातार अपनी पोजीशन बदल रहा है. इसके कारण राजनयिक प्रक्रिया में बाधा आ रही है.
बघई ने किए और भी कई खुलासे
बघई ने यह भी खुलासा किया कि कतर और पाकिस्तान मध्यस्थ के रूप में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं. ईरान ने हाल के दिनों में होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षा घटने के लिए अमेरिकी सैन्य गतिविधियों को कसूरवार ठहराया है.
युद्ध समाप्त का बड़ा समझौता
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस से एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान कहा था कि अमेरिका ने ईरान के साथ चल रहे तीन महीने के युद्ध को समाप्त करने के लिए एक बड़ा समझौता कर लिया है. लेकिन ईरान ने इस दावे को खारिज कर दिया है और कहा है कि ऐसा कोई समझौता नहीं हुआ है.
संकट और लंबा खिंचेगा
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या वाकई इस वीकेंड पर कोई ऐतिहासिक शांति समझौता देखने को मिलेगा या फिर मध्य पूर्व का यह संकट और लंबा खिंचेगा.
डोनाल्ड ट्रंप के मुख्य दावे
ईरान के साथ युद्ध का शानदार सेटलमेंट हो चुका है. कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ. ये खबरें सिर्फ अटकलें हैं. इस समझौते के बाद ईरान कभी परमाणु हथियार नहीं बना पाएगा. ईरान अपनी 'रेड लाइन्स' और शर्तों पर समझौता नहीं करेगा. डील साइन होते ही बंद पड़ा होर्मुज जलमार्ग खोल दिया जाएगा।.अमेरिकी सैन्य हरकतों के कारण होर्मुज अब पहले से ज्यादा असुरक्षित है.
परमाणु हथियार विकसित न कर सके
ट्रंप ने कहा था कि इस रणनीतिक समझौते का सबसे बड़ा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार विकसित न कर सके. उन्होंने यह भी उम्मीद जताई थी कि जैसे ही इस समझौते पर दोनों देशों के दस्तखत होंगे, वैसे ही व्यापारिक जहाजों के लिए बंद पड़े होर्मुज जलमार्ग को आधिकारिक तौर पर दोबारा खोल दिया जाएगा.
ऐतिहासिक शांति समझौता
बहरहाल, ईरान के इस कड़े रुख और तीखे पलटवार के बाद अब इस बात पर सस्पेंस गहरा गया है कि क्या वाकई इस वीकेंड पर कोई ऐतिहासिक शांति समझौता देखने को मिलेगा या फिर मध्य पूर्व का यह संकट और लंबा खिंचेगा.