Courtesy: X/@babug036321
नई दिल्ली: तमिलनाडु की राजनीति में शुक्रवार को बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला. लंबे समय से चल रही अटकलों पर आखिरकार विराम लग गया जब भाजपा के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे के. अन्नामलाई ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया. उनके इस फैसले ने न केवल तमिलनाडु भाजपा बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है. पार्टी नेतृत्व के लगातार प्रयासों के बावजूद अन्नामलाई अपने फैसले पर कायम रहे और आखिरकार उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया.
सूत्रों के मुताबिक, इस्तीफे से पहले अन्नामलाई ने नई दिल्ली में भाजपा के शीर्ष नेताओं से मुलाकात की थी. इस दौरान उन्होंने पार्टी अध्यक्ष नितिन नबीन, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और संगठन महासचिव बीएल संतोष के साथ अलग-अलग बैठकों में हिस्सा लिया. बताया जा रहा है कि इन बैठकों में तमिलनाडु की मौजूदा राजनीतिक स्थिति, पार्टी की रणनीति और भविष्य की दिशा पर चर्चा हुई. इसी दौरान अन्नामलाई ने अपने मन की बात नेतृत्व के सामने रखी और पद छोड़ने की इच्छा जाहिर की. पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें मनाने की कोशिश की, लेकिन वह अपने निर्णय पर अडिग रहे.
पूर्व आईपीएस अधिकारी अन्नामलाई ने बहुत कम समय में तमिलनाडु भाजपा के सबसे लोकप्रिय नेताओं में अपनी पहचान बनाई. उनकी सक्रिय राजनीति, तेजतर्रार बयानबाजी और जमीनी स्तर पर मजबूत पकड़ ने उन्हें राज्य में भाजपा का प्रमुख चेहरा बना दिया था. अन्नामलाई ने लगातार जनसंपर्क अभियानों, यात्राओं और विरोधियों पर आक्रामक हमलों के जरिए पार्टी की मौजूदगी को मजबूत किया. यही वजह रही कि भाजपा का वोट प्रतिशत भी उनके नेतृत्व में उल्लेखनीय रूप से बढ़ा.
अन्नामलाई के कार्यकाल में भाजपा ने तमिलनाडु में अपने वोट शेयर में बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की. 2019 के लोकसभा चुनाव में जहां पार्टी को सीमित समर्थन मिला था, वहीं 2024 तक उसका वोट प्रतिशत कई गुना बढ़ गया. हालांकि इस बढ़त के बावजूद पार्टी चुनावी सफलता को सीटों में तब्दील नहीं कर सकी. खुद अन्नामलाई भी कोयंबटूर जैसी चर्चित सीट से चुनाव जीतने में सफल नहीं हो पाए. इसके बावजूद उन्हें भाजपा के विस्तार का प्रमुख चेहरा माना जाता रहा.
अप्रैल 2025 में भाजपा नेतृत्व ने तमिलनाडु संगठन में बड़ा बदलाव करते हुए नैनार नागेंद्रन को प्रदेश अध्यक्ष बनाया. उस समय इस कदम को एआईएडीएमके के साथ रिश्तों को फिर से मजबूत करने की रणनीति के रूप में देखा गया था. इसके बाद भाजपा ने एआईएडीएमके के नेतृत्व वाले गठबंधन के साथ विधानसभा चुनाव में हिस्सा लिया. गठबंधन के जरिए पार्टी को एक सीट जरूर मिली, लेकिन वोट प्रतिशत में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई. इससे राज्य में पार्टी की भविष्य की रणनीति को लेकर भी सवाल उठने लगे.
अन्नामलाई के इस्तीफे के बाद अब सबसे बड़ा सवाल उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर उठ रहा है. फिलहाल उन्होंने अपने अगले कदम को लेकर कोई सार्वजनिक संकेत नहीं दिया है. वहीं भाजपा के लिए भी यह एक चुनौतीपूर्ण समय माना जा रहा है, क्योंकि राज्य में पार्टी की पहचान और संगठनात्मक मजबूती में अन्नामलाई की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है.