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नई दिल्ली: लद्दाख के शिक्षाविद, इंजीनियर और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक एक बार फिर चर्चा में हैं. जंतर-मंतर पर 20 दिनों से जारी उनके अनशन के बीच दिल्ली पुलिस उन्हें मेडिकल जांच के लिए अस्पताल ले गई. हालांकि यह पहली बार नहीं है जब वांगचुक ने अपनी मांगों को लेकर भूख हड़ताल का रास्ता चुना हो. पिछले कुछ वर्षों में वे कई बार अनशन के जरिए सरकार का ध्यान अपनी मांगों की ओर खींचने की कोशिश कर चुके हैं.
इसके बाद जून 2026 में उन्होंने नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर कथित नीट परीक्षा अनियमितताओं के खिलाफ अनिश्चितकालीन अनशन शुरू किया. उनकी मांग थी कि मामले में जवाबदेही तय हो और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें.
सोनम वांगचुक के कई आंदोलनों से तुरंत नीतिगत बदलाव नहीं हुए, लेकिन उनके अनशन ने हर बार संबंधित मुद्दों को राष्ट्रीय बहस का हिस्सा बनाया. यही वजह है कि वे आज भी शांतिपूर्ण विरोध के प्रमुख चेहरों में गिने जाते हैं.
जनवरी 2023 में सोनम वांगचुक ने लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने और राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर पांच दिन का अनशन किया था. उन्होंने पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय युवाओं के लिए अलग लोक सेवा आयोग की भी मांग उठाई. इस आंदोलन के बाद केंद्र सरकार और लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत शुरू हुई, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका.
मार्च 2024 में वांगचुक ने 21 दिनों का 'क्लाइमेट फास्ट' रखा. उनका उद्देश्य लद्दाख के नाजुक पर्यावरण और संवैधानिक सुरक्षा की मांग को राष्ट्रीय स्तर पर उठाना था. अनशन खत्म होने के बाद भी उन्होंने शांतिपूर्ण आंदोलन जारी रखने और दिल्ली मार्च का ऐलान किया, लेकिन मांगें पूरी नहीं हो सकीं.
सितंबर 2024 में वांगचुक ने समर्थकों के साथ लद्दाख से दिल्ली तक पदयात्रा शुरू की. जब वे राजधानी की सीमा पर पहुंचे तो पुलिस ने उन्हें और कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया. इसके बावजूद आंदोलन जारी रहा और सरकार के साथ बातचीत फिर शुरू हुई, लेकिन कोई अंतिम सहमति नहीं बन पाई.
सितंबर 2025 में लेह एपेक्स बॉडी के आंदोलन के दौरान वांगचुक फिर भूख हड़ताल में शामिल हुए. बाद में उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत में लिया गया और मार्च 2026 में रिहा किया गया.