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पुरी: ओडिशा के पुरी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर से गुरुवार को विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ रथ यात्रा 2026 का शुभारंभ हो चुका है. बता दें, आषाढ़ शुक्ल द्वितीया के पावन अवसर पर शुरू हुई यह ऐतिहासिक यात्रा 27 जुलाई को नीलाद्री बीजे के साथ संपन्न होगी. इस यात्रा की खास बात ये है कि इसमें देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के दर्शन के लिए पुरी पहुंचे हैं. वहीं सुबह से ही मंदिर परिसर और सिंहद्वार के आसपास भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिल रही है और बारिश के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ.
धार्मिक अनुष्ठानों के बाद भगवान जगन्नाथ अपने नंदीघोष, भगवान बलभद्र तालध्वज और देवी सुभद्रा दर्पदलन (देवदलन) रथ पर विराजमान होंगे. इसके बाद मोटी रस्सियों की सहायता से तीनों रथों को खींचते हुए गुंडिचा मंदिर तक ले जाया जाएगा. ताजा जानकरी के अनुसार, रथ यात्रा से पहले तीनों रथों की विधिवत प्रतिष्ठा की गई है. इसके साथ ही नंदीघोष पर श्रीहनुमान, तालध्वज पर श्रीनृसिंह और दर्पदलन पर मां भुवनेश्वरी की स्थापना वैदिक मंत्रोच्चार और हवन की प्रक्रिया भी संपन्न हो चुकी है.
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— Narendra Modi (@narendramodi) July 16, 2026
ମହାପ୍ରଭୁ ଜଗନ୍ନାଥ…
कब से शुरू होती है रथ यात्रा की तैयारी
बता दें, रथ यात्रा की एक विशेष परंपरा यह भी है कि हर वर्ष तीनों रथ नए बनाए जाते हैं. इसकी तैयारी बसंत पंचमी से शुरू हो जाती है, जब शुभ लकड़ियों का चयन किया जाता है. अक्षय तृतीया के दिन मंदिर के पुजारी स्वर्ण कुल्हाड़ी से लकड़ियों का पूजन करने के बाद निर्माण कार्य का शुभारंभ कराते हैं. रथों के निर्माण में लोहे की कीलों का प्रयोग नहीं किया जाता, बल्कि लकड़ी के जोड़ और प्राकृतिक रस्सियों का उपयोग किया जाता है.
भगवान जगन्नाथ का नंदीघोष रथ लगभग 45.6 फीट ऊंचा और 16 पहियों वाला होता है, जिसका रंग लाल और पीला है. भगवान बलभद्र का तालध्वज रथ 45 फीट ऊंचा, 14 पहियों वाला तथा लाल-हरे रंग का होता है. वहीं देवी सुभद्रा का दर्पदलन रथ 44.6 फीट ऊंचा, 12 पहियों वाला और लाल-काले रंग से सुसज्जित रहता है.
ବିଶ୍ଵପ୍ରସିଦ୍ଧ ରଥଯାତ୍ରା ଉପଲକ୍ଷେ ଦେଶବିଦେଶରେ ରହୁଥିବା ଶ୍ରୀଜଗନ୍ନାଥଙ୍କ ଭକ୍ତଗଣଙ୍କୁ ମୁଁ ହାର୍ଦ୍ଦିକ ଶୁଭେଚ୍ଛା ଜ୍ଞାପନ କରୁଅଛି । ଏହି ମହାପର୍ବରେ ମହାପ୍ରଭୁ ଶ୍ରୀଜଗନ୍ନାଥ ବଡ଼ଭାଇ ବଳଭଦ୍ର, ଭଗିନୀ ସୁଭଦ୍ରା ଓ ଚକ୍ରରାଜ ସୁଦର୍ଶନଙ୍କ ସହିତ ରଥାରୂଢ଼ ହୋଇ ଭକ୍ତମାନଙ୍କ ସହିତ ମିଳିତ ହୁଅନ୍ତି । ଭକ୍ତ ଓ ଭଗବାନଙ୍କ ମିଳନର ଏହି ପର୍ବ…
— President of India (@rashtrapatibhvn) July 16, 2026
रथ यात्रा में शामिल होने पहुंचे प्रसिद्ध गायक सोनू निगम ने कहा कि उन्होंने पहले कई बार इस अवसर पर प्रस्तुति दी है, लेकिन पहली बार प्रत्यक्ष दर्शन का सौभाग्य मिला है. बता दें, इस दौरान उन्होंने पुरी की व्यवस्था और आध्यात्मिक वातावरण की सराहना की है. वहीं विदेशों से आए श्रद्धालुओं ने भी भगवान जगन्नाथ के दर्शन को अपने जीवन का सौभाग्य बताया है. यात्रा समाप्त होने के बाद परंपरा के अनुसार तीनों रथों की लकड़ियो को छोटे-छोटे टुकड़े में काटकर पवित्र लकड़ी मंदिर की विशाल रसोई में इसका उपयोग महाप्रसाद बनाने के लिए किया जाएगा.