Courtesy: Social Media
Manmohan Singh: भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का 26 दिसंबर की रात को 92 वर्ष की आयु में निधन हो गया. उनके निधन के साथ भारत ने न केवल एक शानदार अर्थशास्त्री बल्कि एक प्रभावशाली नेता और समाज सुधारक को खो दिया है. सिंह अपने पीछे अपनी पत्नी गुरचरण सिंह और तीन बेटियों का परिवार छोड़ गए हैं. डॉ. मनमोहन सिंह के सम्मान में केंद्र सरकार ने सात दिनों का राजकीय शोक घोषित किया है. उनका अंतिम संस्कार शनिवार को पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा.
समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने 2018 में मुंबई में एक कार्यक्रम में दिए गए भाषण में स्वीकार किया था कि 2004 के लोकसभा चुनावों के दौरान उन्हें अहसास था कि डॉ. मनमोहन सिंह उनसे बेहतर प्रधानमंत्री साबित होंगे. उन्होंने कहा था कि मुझे अपनी सीमाएं पता थीं. मुझे पता था कि मनमोहन सिंह मुझसे बेहतर प्रधानमंत्री साबित होंगे. डॉ. सिंह के निधन पर वैश्विक और राष्ट्रीय नेताओं ने गहरा शोक व्यक्त किया.
डॉ. सिंह ने 2004 से 2014 तक भारत के प्रधानमंत्री के रूप में कार्य किया. उनकी राजनीतिक यात्रा 1991 में शुरू हुई, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव ने उन्हें अपने कैबिनेट में वित्त मंत्री नियुक्त किया. वित्त मंत्री के रूप में उन्होंने भारत में आर्थिक उदारीकरण की शुरुआत करते हुए कई साहसिक सुधार लागू किए. जिनसे भारत की आर्थिक प्रगति के लिए नई राहें खुलीं. अपने सियासी सफर में मनमोहन सिंह ने ऐसे कई बड़े फैसले लिए जिसे भूल पाना नामुमकिन है.
मनमोहन सिंह द्वारा लिए गए बड़े फैसलों में मनरेगा योजना का नाम शामिल है. जिसकी मदद से ग्रामीण रोजगार के माध्यम से गरीबी हटाने का प्रयास किया गया. इसके अलावा सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI) कानून की मदद से मनमोहन सरकार ने पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की कोशिश की. इसके अलावा शिक्षा का अधिकार अधिनियम के माध्यम से मनमोहन सिंह ने हर बच्चे के लिए शिक्षा की गारंटी तय की. वहीं भूमि अधिग्रहण सुधार योजना के माध्यम से पीएम सिंह प्रभावित लोगों के पुनर्वास और मुआवजे को सुनिश्चित करने में सफल रहे. उन्होंने गरीबों के लिए खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली का विस्तार किया .