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नीतीश का फिर चला जादू, बिहार में एनडीए की धमाकेदार जीत तय

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में भाजपा नीत एनडीए ने बड़ी जीत हासिल की है. गठबंधन 200 से ज्यादा सीटों पर आगे चल रहा है. नीतीश कुमार की जदयू भी इसमें शामिल है. विपक्षी महागठबंधन सिर्फ 39 सीटों पर सिमट गया है. रिकॉर्ड मतदान हुआ और एनडीए का यह 2010 के बाद दूसरा सबसे अच्छा प्रदर्शन है.

Calendar Last Updated : 14 November 2025, 01:58 PM IST
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बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के रुझानों में भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने शानदार प्रदर्शन किया है. इसमें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जनता दल यूनाइटेड भी शामिल है. गठबंधन 200 सीटों पर आगे चल रहा है. यह आंकड़ा बहुमत के लिए जरूरी 122 सीटों से काफी ज्यादा है. विपक्ष पूरी तरह हक्का बक्का है. एनडीए की यह जीत राज्य की सियासत में नया अध्याय लिख रही है.  

विपक्षी महागठबंधन को इस चुनाव में भारी नुकसान हुआ है. रुझानों में वह सिर्फ 39 सीटों पर आगे है. राष्ट्रीय जनता दल को यही बढ़त मिली है. कांग्रेस और मुकेश सहनी की विकासशील इंसान पार्टी का खाता खुलना मुश्किल लग रहा है. वामपंथी दलों में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी लेनिनवादी लिबरेशन चार सीटों पर और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी एक सीट पर आगे है. प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी भी पूरी तरह असफल रही है.  

200 के पार पहुंची एनडीए सरकार 

चुनाव दो चरणों में हुए. पहला चरण 6 नवंबर को और दूसरा 11 नवंबर को. राज्य में मतदान का नया कीर्तिमान बना. चुनाव आयोग के आंकड़ों से पता चलता है कि पहले चरण में 65.08 प्रतिशत वोट पड़े. दूसरे चरण में यह 69.20 प्रतिशत रहा. कुल मिलाकर 67.13 प्रतिशत मतदान हुआ. यह बिहार के इतिहास में सबसे ज्यादा है.

उच्च मतदान से एनडीए को फायदा मिला लगता है. 200 सीटों का आंकड़ा पार करना एनडीए के लिए बड़ी उपलब्धि है. यह 2010 के बाद गठबंधन का दूसरा सबसे अच्छा नतीजा है. उस साल एनडीए ने 206 सीटें जीती थीं. नीतीश कुमार की अगुवाई में जदयू ने भी मजबूत भूमिका निभाई. भाजपा और उसके सहयोगी दलों ने ग्रामीण और शहरी इलाकों में अच्छा समर्थन जुटाया. 

बंपर वोटिंग का बंपर नतीजा

महागठबंधन की हार कई वजहों से हुई. राजद को सिर्फ 39 सीटों पर संतोष करना पड़ रहा है. कांग्रेस पूरी तरह कमजोर पड़ी. वीआईपी पार्टी भी कोई प्रभाव नहीं दिखा सकी. वाम दलों की सीमित सफलता से गठबंधन को कोई राहत नहीं मिली. प्रशांत किशोर की पार्टी ने नई उम्मीद जगाई थी लेकिन वह धराशायी हो गई. यह चुनाव दो चरणों में संपन्न हुआ. मतदाताओं ने उत्साह दिखाया. रिकॉर्ड वोटिंग से लोकतंत्र मजबूत हुआ. एनडीए की जीत से नीतीश कुमार की स्थिति और मजबूत हो गई है. भाजपा ने भी अपनी पकड़ बढ़ाई. विपक्ष को अब आत्ममंथन करना होगा.  

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