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सरकार ने किया ऐलान! बिरसा मुंडा के नाम से अब जाना जाएगा सराय काले खां चौक

केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने ऐलान किया कि दिल्ली के सराय काले खां के नाम से पहचाने जाने वाला चौक अब बिरसा मुंडा के नाम से जाना जाएगा. यह फैसला बिरसा मुंडा के जन्मदिवस पर लिया गया है.

Calendar Last Updated : 15 November 2024, 01:17 PM IST
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Birsa Munda Jayanti: देश भर में आज भारत के महान आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी भगवान बिरसा मुंडा की जयंती मनाई जा रही है. इस अवसर पर एक महत्वपूर्ण घोषणा की गई है. शुक्रवार को दिल्ली के सराय काले खां स्थित अंतरराज्यीय बस टर्मिनल (आईएसबीटी) के बाहर स्थित चौक का नाम भगवान बिरसा मुंडा के नाम पर रखा जाएगा. इस घोषणा का उद्घाटन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में किया गया. जिन्होंने आदिवासी गौरव दिवस के मौके पर भगवान बिरसा मुंडा की भव्य प्रतिमा का अनावरण किया.

आवास और शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने इस बारे में घोषणा करते हुए कहा कि यह कदम बिरसा मुंडा के जीवन और उनके योगदान को सम्मानित करने के लिए उठाया गया है. खट्टर ने कहा कि यह नामकरण न केवल दिल्ली के नागरिकों, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बस स्टैंड पर आने वाले यात्रियों के लिए भी प्रेरणास्त्रोत बनेगा. भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा और इस चौक का नाम देखकर लोग उनके संघर्षों से प्रेरित होंगे.

धर्मांतरण के खिलाफ लड़ी लड़ाई

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस अवसर पर भगवान बिरसा मुंडा की बहुमूल्य विरासत को याद किया. उन्होंने कहा कि बिरसा मुंडा का संघर्ष न केवल स्वतंत्रता संग्राम के संदर्भ में था, बल्कि उन्होंने धर्मांतरण के खिलाफ भी आवाज उठाई. शाह ने उनकी साहसिकता की सराहना करते हुए कहा कि बिरसा मुंडा ने अपने जीवन में अंग्रेजों के शासन और धर्मांतरण के खिलाफ अपनी आवाज उठाई, जो उस समय के लिए एक साहसिक कदम था.

भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के अवसर पर इस आयोजन को एक ऐतिहासिक अवसर के रूप में मनाया गया. उनके सामाजिक सुधारों और धर्मांतरण विरोधी आंदोलन के लिए उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा. 

कौन थे काले खां 

दिल्ली के जिस चौका का नाम बदला गया वो चौक पहले काले खां चौक के नाम से जाना जाता था. इनके नाम पर दिल्ली में एक पूरा इलाका बसा है, जो कि दिल्ली के दक्षिण पूर्वी इलाके में आता है. सराय उन जगहों को कहा जाता हैं जहां पहले लोग अपने सफर के दौरान आराम करते थे. काले खां एक सूफी संत थे जो शेर शाह सूरी के समय में काफी प्रसिद्ध हुआ करते थे. जिनके पीछे सराय लगाया गया है.  

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