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शीतकालीन सत्र के दौरान संसद में विपक्ष का अनोखा प्रदर्शन, जैकेट के पीछे लिखा 'मोदी अडानी एक हैं' के नारे

शीतकालीन सत्र के दौरान विपक्ष का सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन देकने को मिला. राहुल गांधी समेत तमाम विपक्ष नेताओं ने 'मोदी अडानी एक हैं' के नारे लगाए. साथ ही जैकेट के पीछे इसकी तस्वीर भी लगाई.

Calendar Last Updated : 05 December 2024, 02:51 PM IST
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Adani Jackets: संसद में शीतकालीन सत्र का आज आठवां दिन था. जिसमें एक बार फिर विपक्ष ने जमकर बवाल काटा है. अडानी समूह भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी मामले पर संसद परिसर में विपक्षी सांसदों ने एक अनोखे अंदाज में विरोध प्रदर्शन किया. इस दौरान उन्होंने काली हाफ जैकेट पहनी जिन पर 'मोदी अडानी एक हैं' नारे लिखे हुए थे. इस विरोध का मकसद संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से अडानी के खिलाफ जांच की मांग करना था. जिनके खिलाफ अमेरिकी अभियोजकों ने रिश्वतखोरी और अन्य अपराधों के आरोप लगाए हैं.

विरोध में कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी और उनकी बहन प्रियंका गांधी भी शामिल हुईं. दोनों ने संसद परिसर में प्रदर्शन किया और इस दौरान 'मोदी अडानी एक हैं' नारे लिखे जैकेट पहने हुए थे. राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि मोदी जी अडानी जी की जांच नहीं करवा सकते, क्योंकि अगर वह ऐसा करेंगे तो उन्हें खुद की जांच का सामना करना पड़ेगा. मोदी और अडानी एक हैं.

कांग्रेस के गंभीर आरोप 

कांग्रेस का यह आरोप है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उद्योगपति गौतम अडानी के बीच गहरे संबंध हैं. अगर अडानी के खिलाफ जांच शुरू होती है तो इसका सीधा असर मोदी सरकार पर भी पड़ सकता है. गांधी ने पिछले महीने भी कहा था कि अडानी को गिरफ्तार किया जाना चाहिए. कांग्रेस, आम आदमी पार्टी (आप), राजद, शिवसेना (यूबीटी), डीएमके और वामपंथी दलों के सांसदों ने अडानी के खिलाफ संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से जांच की मांग की है. वे इस मुद्दे पर लगातार संसद में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं.

क्या है पूरा मामला 

बुधवार को इन दलों के सांसदों ने संसद परिसर में 'मोदी-अडानी एक हैं' बैनर पकड़े हुए थे और जोरदार नारेबाजी की थी. हालांकि तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने इस विरोध से दूरी बनाए रखी. उनके सांसद इस विरोध में शामिल नहीं हुए. गौतम अडानी के खिलाफ अमेरिकी अदालत में रिश्वतखोरी और धोखाधड़ी के आरोप लगाए गए हैं. अडानी समूह ने इन आरोपों को निराधार बताया था. अडानी समूह का कहना है कि यह आरोप राजनीति से प्रेरित हैं और उनका कोई वास्तविक आधार नहीं है.

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