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महिलाओं द्वारा कानून का किया जा रहा दुरुपयोग? अतुल सुभाष के आत्महत्या के बाद सुप्रीम कोर्ट की चेतावनी

सोशल मीडिया पर अतुल घोष इस समय काफी ट्रेंड कर रहे हैं. इसी के साथ लोगों के दिमाग में एक सवाल भी ट्रेंड कर रहा कि महिलाओं द्वारा वैवाहिक विवाद के मामलों में कानून के दुरुपयोग किस तरह से किया जा रहा है. हालांकि इसी तरह के एक दूसरे मामले में सुप्रीम कोर्ट ने चेतावनी दी है.

Calendar Last Updated : 11 December 2024, 02:49 PM IST
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Supreme Court: बेंगलुरु के रहने वाले अतुल घोष ने अपनी पत्नी और ससुराल वालों से परेशान होकर आत्महत्या कर लिया. इससे पहले पीड़ित ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी शेयर किया. जिसमें उसने अपनी पूरी कहानी बताई. उनका ये वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. जिसमें लोग मृतक की पत्नी और महिलाओं के लिए बनाए गए कानून के दूर उपयोग की बातें कर रहे हैं. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने एक अलग मामले में महिलाओं द्वारा अपने पतियों के खिलाफ दर्ज कराए जाने वाले वैवाहिक विवाद के मामलों में कानून के दुरुपयोग के खिलाफ चेतावनी दी है. 

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि धारा 498(ए) जो भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत एक महिला के खिलाफ उसके पति और ससुराल वालों द्वारा की गई क्रूरता से निपटने के लिए बनाई गई थी अब उसकादुरुपयोग प्रतिशोध के लिए व्यक्तिगत उपकरण के रूप में किया जा रहा है, ऐसा करना बिल्कुल भी सही नहीं है.

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा

जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की बेंच ने मंगलवार को सुनवाई करते हुए कहा कि धारा 498(ए) को राज्य द्वारा त्वरित हस्तक्षेप के रूप में पेश किया गया था ताकि महिलाओं को उनके पति और ससुराल वालों द्वारा की जाने वाली क्रूरता से बचाया जा सके. लेकिन अब इस कानून कादुरुपयोग किया जा रहा है. कोर्ट ने इस बात पर भी जोर दिया कि हाल के वर्षों में वैवाहिक विवादों में वृद्धि और सामाजिक तनाव के कारण ऐसे मामलों का दुरुपयोग बढ़ा है.

यह दुरुपयोग तब हो रहा है जब कुछ महिलाएं और उनके परिवार इसे एक प्रतिशोधात्मक उपाय के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं. इसके परिणामस्वरूप कानूनी प्रक्रियाओं में अस्पष्ट और सामान्यीकृत आरोपों की भरमार हो सकती है. जिससे न केवल आरोपी पति और उसके परिवार के लिए समस्याएं उत्पन्न होती हैं बल्कि इस कानून का संदेश भी ग़लत दिशा में जा सकता है. 

कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग

न्यायाधीशों ने यह भी कहा कि अस्पष्ट और सामान्यीकृत आरोप लगाने से कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग हो सकता है. ऐसी परिस्थितियों में कानूनी प्रक्रियाओं का सही तरीके से पालन और न्याय सुनिश्चित करना मुश्किल हो सकता है. कोर्ट ने तेलंगाना उच्च न्यायालय के फैसले को पलटते हुए पति और उसके परिवार के खिलाफ पत्नी द्वारा दायर किए गए क्रूरता के आरोपों को खारिज कर दिया. तेलंगाना उच्च न्यायालय ने मामले को खारिज करने से इनकार कर दिया था लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया.
 

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