नीतीश सरकार का बड़ा फैसला, महिला रोजगार योजना के तहत वित्तीय सहायता 10,000 रुपए से बढ़ाकर 2 लाख रुपए की

मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत महिलाओं को दी जाने वाली वित्तीय सहायता 10,000 रुपए से बढ़ाकर 2 लाख रुपये कर दी गई है. यह अतिरिक्त राशि महिलाओं के काम और प्रदर्शन के आधार पर दी जाएगी.

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नई दिल्लीः बिहार सरकार ने महिलाओं की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है. मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत महिलाओं को दी जाने वाली वित्तीय सहायता 10,000 रुपए से बढ़ाकर 2 लाख रुपए कर दी गई है. यह अतिरिक्त राशि महिलाओं के काम और प्रदर्शन के आधार पर दी जाएगी. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कैबिनेट बैठक के बाद इस फैसले की घोषणा की. उन्होंने कहा कि बढ़ी हुई सहायता राशि किस्तों में दी जाएगी और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि शुरुआती 10,000 रुपए का इस्तेमाल व्यवसाय शुरू करने के लिए ठीक से किया गया हो.

आगे की सहायता प्रदर्शन से जुड़ी होगी

इस योजना के तहत जिन महिलाओं को पहले ही 10,000 रुपये की पहली किस्त मिल चुकी है, उनके काम की छह महीने बाद समीक्षा की जाएगी. अगर महिला ने उस राशि से सफलतापूर्वक स्वरोजगार शुरू कर दिया है, तो उसे आगे वित्तीय सहायता दी जाएगी. जरूरत पड़ने पर, अच्छी तरह से चल रहे व्यवसाय के लिए एकमुश्त राशि भी दी जा सकती है.

1.56 करोड़ महिलाओं को पहली किस्त मिली

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस योजना का उद्देश्य हर परिवार में एक महिला को आत्मनिर्भर बनाना है. अब तक, राज्य में 1.56 करोड़ महिलाओं को DBT (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में 10,000 रुपये मिले हैं. ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बाकी पात्र महिलाओं को भी जल्द ही यह राशि मिलेगी.

मार्केटिंग और सरकारी योजनाओं से जोड़ने पर जोर

सरकार ने संबंधित विभागों को महिलाओं द्वारा बनाए गए उत्पादों की मार्केटिंग के लिए बेहतर व्यवस्था करने का निर्देश दिया है. इसके साथ ही, महिलाओं को यूनिफॉर्म सिलाई, सुधा बिक्री केंद्र और दीदी की रसोई (महिला स्वयं सहायता समूह की रसोई) जैसी सरकारी योजनाओं से जोड़ा जाएगा ताकि उनके उत्पादों को बाजार मिल सके.

पलायन रोकने-स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देने पर ध्यान

नीतीश कुमार ने कहा कि यह योजना राज्य के भीतर महिलाओं को रोजगार प्रदान करेगी और लोगों को काम के लिए बिहार छोड़ने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ेगा. सरकार का मानना ​​है कि बढ़ी हुई मदद से महिलाओं की एंटरप्रेन्योरशिप को बढ़ावा मिलेगा और लोकल लेवल पर रोजगार के नए मौके बनेंगे. इस फैसले को बिहार में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है.

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