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CBI ने अनिल अंबानी और रिलायंस कम्युनिकेशन के खिलाफ शुरू की जांच, ऋण धोखाधड़ी से जुड़ा है मामला

सीबीआई ने 21 अगस्त को एसबीआई की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया. प्राथमिकी में भारतीय दंड संहिता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आपराधिक षड्यंत्र, धोखाधड़ी और कदाचार के आरोप शामिल हैं.

Calendar Last Updated : 05 September 2025, 10:52 AM IST
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CBI FIR Anil Ambani: केंद्रीय जांच ब्यूरो ने 2929.05 करोड़ रुपये के कथित ऋण चूक मामले में रिलायंस कम्युनिकेशन लिमिटेड (आरकॉम) और इसके निदेशक अनिल डी. अंबानी के खिलाफ जांच शुरू की है. भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की शिकायत पर यह कार्रवाई की गई है. सीबीआई ने कंपनी और अन्य अज्ञात लोगों पर धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात के आरोप लगाए हैं.

सीबीआई ने 21 अगस्त को एसबीआई की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया. प्राथमिकी में भारतीय दंड संहिता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आपराधिक षड्यंत्र, धोखाधड़ी और कदाचार के आरोप शामिल हैं. आरोप है कि आरकॉम ने बैंकों के साथ धोखाधड़ी की, जिससे 2929.05 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ. सीबीआई के अनुसार, कंपनी ने खातों में हेरफेर कर बैंक से मिले धन का दुरुपयोग किया.

गलत जानकारी देकर बैंकों से लिया लोन

फोरेंसिक ऑडिटर बीडीओ इंडिया एलएलपी ने 15 अक्टूबर 2020 को अपनी जांच की रिपोर्ट सौंपी. यह रिपोर्ट आरकॉम, रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड (आरटीएल), और रिलायंस इंफ्राटेल लिमिटेड (आरआईटीएल) की संयुक्त जांच पर आधारित थी. जिसमें 2013 से 2017 तक के ट्रांजेक्शन का डेटा देखा गया. ऑडिट में पाया गया कि आरोपियों ने गलत जानकारी देकर बैंकों से ऋण लिया और शर्तों का उल्लंघन कर धन का गबन किया. सीबीआई की प्राथमिकी के अनुसार, आरकॉम ने बैंकों से मिले ऋण को अपनी सहायक कंपनियों में स्थानांतरित किया. कंपनी ने आरटीएल को 783.77 करोड़ रुपये और आरआईटीएल को 1435.24 करोड़ रुपये हस्तांतरित किए. यह धन सीधे जरूरतमंद कंपनी को नहीं भेजा गया, बल्कि कई सहायक कंपनियों के जरिए लेनदेन किए गए. सीबीआई का कहना है कि यह हेरफेर धन के दुरुपयोग और विश्वासघात के लिए किया गया. अनिल अंबानी या प्रबंधन ने इन लेनदेन का कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया.

रिलायंस कम्युनिकेशन पर गंभीर आरोप

रिलायंस कम्युनिकेशन 2002 में स्थापित हुई थी. यह कंपनी भारत और विदेशों में वायरलेस, वायरलाइन और आईटी सेवाएं प्रदान करती थी. हालांकि 2017 में उनकी कंपनी बंद हो गई. एसबीआई 2004 से कंपनी को कार्यशील पूंजी सुविधाएं दे रहा था. बैंक ने 2012 में 15 सौ करोड़ और 2016 में 565 करोड़ रुपये का अतिरिक्त ऋण दिया था . लेकिन कंपनी ने इन फंड्स का दुरुपयोग किया. सीबीआई ने काल्पनिक देनदारों का सृजन, बिलों में छूट, और पूंजीगत अग्रिमों को बट्टे खाते में डालने जैसे आरोप भी लगाए हैं. रिलायंस एडीए समूह की एक कंपनी को दिए गए अग्रिमों में भी गड़बड़ी पाई गई. 23 अगस्त को सीबीआई ने आरकॉम और अनिल अंबानी से जुड़े परिसरों की तलाशी ली.

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