Courtesy: AI generated
नई दिल्ली: आज यानी 29 जून 2026 के लिए सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल के नए दाम जारी कर दिए हैं. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर तेजी देखने को मिल रही है, लेकिन इसका असर फिलहाल देश के प्रमुख शहरों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर नहीं पड़ा है. ऐसे में अगर आप आज वाहन में ईंधन भरवाने जा रहे हैं, तो अपने शहर के ताजा रेट जान लेना आपके लिए जरूरी है.सरकारी तेल कंपनियों ने सोमवार को भी दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता समेत कई बड़े शहरों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है. हर दिन सुबह 6 बजे ईंधन के नए रेट जारी किए जाते हैं, लेकिन आज भी अधिकतर शहरों में पुराने दाम ही लागू हैं.
इन शहरों में मिली राहत
कुछ शहरों में आज पेट्रोल और डीजल के दाम कम किए गए हैं. पटना में पेट्रोल ₹113.37 और डीजल ₹99.36 प्रति लीटर हो गया है. यहां पेट्रोल ₹1.18 और डीजल ₹1.13 प्रति लीटर सस्ता हुआ है. वहीं भुवनेश्वर में भी उपभोक्ताओं को राहत मिली है. यहां पेट्रोल ₹108.97 और डीजल ₹100.68 प्रति लीटर बिक रहा है. दोनों ईंधनों की कीमत में क्रमशः ₹1.52 और ₹1.47 प्रति लीटर की कमी दर्ज की गई है.
कच्चे तेल में फिर आई तेजी
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें एक बार फिर बढ़ने लगी हैं. अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव तथा इजरायल-ईरान संघर्ष का असर ग्लोबल ऑयल मार्केट पर दिखाई दे रहा है. सोमवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 73.39 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जबकि अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड करीब 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता नजर आया. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले दिनों में कच्चा तेल लगातार महंगा होता रहा, तो इसका असर भारत में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है.भारतीय संस्कृति उत्पाद
तेल कंपनियों ने ग्राहकों को दी राहत
मार्च से मई के दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया था. इसके बावजूद सरकारी तेल कंपनियों इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने लंबे समय तक ग्राहकों पर इसका पूरा बोझ नहीं डाला. करीब ढाई महीने तक कंपनियों ने बढ़ी हुई लागत खुद उठाई और बाद में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में केवल ₹7.50 प्रति लीटर की बढ़ोतरी की. यह बढ़ोतरी कई अन्य बड़े देशों की तुलना में काफी कम रही, जिससे आम लोगों को राहत मिली.
कंपनियों को हुआ बड़ा नुकसान
एक रिपोर्ट के अनुसार, मार्च से मई के बीच तीनों सरकारी तेल कंपनियों को लगभग 40,000 से 45,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ. इसके बावजूद कंपनियों ने ईंधन की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी करने से बचते हुए उपभोक्ताओं को राहत देने की कोशिश जारी रखी. भारत अपनी कुल जरूरत का 88 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है. इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाला कोई भी बड़ा बदलाव सीधे तौर पर देश की ईंधन लागत को प्रभावित करता है.
कैसे तय होती हैं पेट्रोल-डीजल की कीमतें?
भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें कई अहम कारकों के आधार पर तय की जाती हैं. इनमें अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का भाव, डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति, केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा लगाए गए टैक्स तथा परिवहन लागत शामिल होती है. यदि कच्चा तेल लगातार महंगा होता है या रुपये की कीमत कमजोर पड़ती है, तो भविष्य में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना बढ़ जाती है.