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दिल्ली कोर्ट की ओर से बॉलीवुड स्टार धर्मेंद्र को मिला समन, धोखाधड़ी से जुड़ा है मामला

बॉलीवुड के सुपर स्टार धर्मेंद्र और दो अन्य लोगों को दिल्ली कोर्ट की ओर से समन जारी किया गया है. अदालत द्वारा 'गरम धरम ढाबा' फ्रेंचाइजी से जुड़े धोखाधड़ी मामले में अभिनेता को तलब किया गया है.

Calendar Last Updated : 10 December 2024, 11:42 AM IST
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Garam Dharam Dhaba:  दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र और दो अन्य आरोपियों को 'गरम धरम ढाबा' फ्रेंचाइजी से जुड़े धोखाधड़ी मामले में समन जारी किया है. यह समन दिल्ली के व्यवसायी सुशील कुमार की शिकायत के बाद जारी किया गया है. जिन्होंने आरोप लगाया है कि उन्हें इस फ्रेंचाइजी में निवेश करने के लिए गुमराह किया गया था. 

पटियाला हाउस कोर्ट की ओर  से कहा गया है कि रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्य प्रथम दृष्टया संकेत देते हैं कि आरोपी व्यक्तियों ने शिकायतकर्ता को धोखाधड़ी के माध्यम से अपने इरादे को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया है. समन में आरोपियों को धारा 420 (धोखाधड़ी), 120 बी (साजिश), 34 (सामूहिक अपराध) और धारा 506 (आपराधिक धमकी) के तहत अपराधी ठहराया गया है. इस मामले में अदालत ने अगली सुनवाई 20 फरवरी को तय की है.

सात प्रतिशत लाभ का आश्वासन

इस मामले में शिकायतकर्ता सुशील कुमार ने आरोप लगाया कि अप्रैल 2018 में सह-आरोपी ने धरम सिंह देओल की ओर से उन्हें उत्तर प्रदेश के NH-24/NH-9 पर 'गरम धरम ढाबा' की फ्रेंचाइजी खोलने का प्रस्ताव दिया था. उन्हें यह बताया गया कि कनॉट प्लेस (दिल्ली) और मुरथल (हरियाणा) में स्थित 'गरम धरम ढाबा' की शाखाएं लगभग 70 से 80 लाख का मासिक कारोबार करती हैं. उन्हें इस व्यापार में 41 लाख का निवेश करने का लालच दिया गया था. साथ ही सात प्रतिशत लाभ का आश्वासन भी दिया गया.

शिकायतकर्ता ने क्या कहा?

शिकायतकर्ता के मुताबिक इसके बाद कई बैठकों और ईमेल के आदान-प्रदान के बाद उसे ₹63 लाख प्लस टैक्स का निवेश करने और व्यवसाय के लिए ज़मीन की व्यवस्था करने के लिए कहा गया. इस दौरान 22 सितंबर 2018 को एक आशय पत्र पर हस्ताक्षर किए गए. जिसमें भुगतान और व्यावसायिक शर्तों को रेखांकित किया गया था. शिकायतकर्ता ने ₹17.70 लाख का भुगतान चेक द्वारा किया, जिसे आरोपियों ने भुना लिया. बाद में नवंबर 2018 में जमीन खरीदी गई लेकिन प्रतिवादियों ने कभी भी जमीन का निरीक्षण नहीं किया या शिकायतकर्ता से मुलाकात नहीं की. इसके चलते शिकायतकर्ता का दावा है कि उसे धोखाधड़ी का शिकार होना पड़ा और उसे आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा.

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