menu-icon
The Bharatvarsh News

हर महिला के लिए HPV जरुरी, जानें टीकाकरण का सही समय

गर्भाशय ग्रीवा में तेजी से कैंसर की समस्या बढती जा रही है. इसकी प्राथमिक वजह ह्यूमन पेपिलोमा वायरस (HPV) है. सही जानकारी और समय पर कार्रवाई के जरिए इसे रोका जा सकता है. टीकों के कोई गंभीर साइड इफेक्ट ज्ञात नहीं हैं. खमीर से एलर्जी वाले लोग इसे लेने से पहले डॉक्टर से परामर्श करें.  

Calendar Last Updated : 07 January 2025, 10:54 AM IST
Share:

HPV: सर्वाइकल कैंसर भारत में महिलाओं के बीच सबसे आम और रोकथाम योग्य कैंसर में से एक है. यह कैंसर गर्भाशय ग्रीवा को प्रभावित करता है और इसकी प्राथमिक वजह ह्यूमन पेपिलोमा वायरस (HPV) है. सही जानकारी और समय पर कार्रवाई के जरिए इसे रोका जा सकता है. टीकों के कोई गंभीर साइड इफेक्ट ज्ञात नहीं हैं. खमीर से एलर्जी वाले लोग इसे लेने से पहले डॉक्टर से परामर्श करें.  

2015 में WHO ने घोषणा की कि सर्वाइकल कैंसर को दुनिया से खत्म किया जा सकता है. इसके लिए HPV टीकाकरण का व्यापक प्रसार करना होगा. सभी महिलाओं में स्क्रीनिंग करनी होगी और सबसे ज्यादा जरुरी इसका समय पर उपचार करवाना होगा. टीकाकरण और जांच दोनों साथ में सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम के लिए सबसे प्रभावी उपाय हैं. इससे बचने के लिए 26 के बाद भी टीका लाभकारी हो सकता है. इसके साथ व्यक्तिगत स्थिति के अनुसार टीकाकरण और जांच का निर्धारण करें.  

सर्वाइकल कैंसर के लक्षण  

  • असामान्य योनि रक्तस्राव.  
  • मासिक धर्म के बीच रक्तस्राव.  
  • संभोग के बाद दर्द या रक्तस्राव.  
  • बदबूदार और लाल-भूरे रंग का योनि स्राव.  

इससे बचने के उपाय 

1. टीकाकरण  

 

  • HPV टीका वायरस के खतरनाक उपभेदों से बचाव करता है.  
  • 9-14 वर्ष (6-12 महीने के अंतराल पर 2 खुराक).  
  • 15-26 वर्ष (3 खुराक).  
  • 26-45 वर्ष की महिलाएं भी डॉक्टर से परामर्श के बाद टीका ले सकती हैं.  

टीका केवल महिलाओं को ही नहीं, बल्कि पुरुषों को भी लाभ पहुंचाता है क्योंकि यह जननांग क्षेत्रों और अन्य HPV-सम्बंधित पूर्व-कैंसर घावों से बचाता है.  

उपलब्ध टीके:  

  • गार्डासिल 9: HPV के 9 खतरनाक प्रकारों के विरुद्ध.  
  • गार्डासिल 4: HPV के 4 प्रकारों के विरुद्ध.  
  • सर्वावैक: HPV के 4 प्रकारों को कवर करता है.  


2. गर्भाशय ग्रीवा की नियमित जांच  

  • पैप स्मीयर टेस्ट: गर्भाशय ग्रीवा की कोशिकाओं में किसी भी असामान्य बदलाव का पता लगाने के लिए.  
  • एचपीवी डीएनए टेस्ट: हाई-रिस्क HPV उपभेदों की जांच.  
  • जांचें सामान्यतः 21 वर्ष की आयु से शुरू होनी चाहिए और डॉक्टर के निर्देशानुसार दोहराई जानी चाहिए.  

सम्बंधित खबर

Recent News