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नई दिल्ली: आज की आधुनिक और व्यस्त जीवनशैली ने इंसान के काम करने के तरीके को पूरी तरह बदल दिया है. दफ्तरों में घंटों एक ही जगह बैठकर काम करना, लगातार स्मार्टफोन की स्क्रीन पर नजरें टिकाए रखना और शारीरिक गतिविधियों में आई कमी अब हमारी सेहत पर भारी पड़ रही है. इन्हीं खराब आदतों के कारण जो बीमारी पहले ढलती उम्र के बुजुर्गों में देखी जाती थी, वह अब युवाओं को तेजी से अपनी चपेट में ले रही है. वह है गर्दन का दर्द, जिसे आम बोलचाल की भाषा में 'सर्वाइकल' कहा जाता है.
क्या है सर्वाइकल और यह क्यों होता है?
चिकित्सा विज्ञान के अनुसार, हमारी गर्दन के भीतर रीढ़ की हड्डी के ऊपरी हिस्से को सर्वाइकल स्पाइन कहा जाता है. इसमें सात छोटी-छोटी हड्डियां होती हैं, जो गर्दन को सहारा देती हैं और उसे आसानी से मुड़ने में मदद करती हैं. इन हड्डियों के बीच स्पंजी डिस्क होती हैं, जो किसी भी तरह के झटके को सोखने का काम करती हैं. जब हम लगातार गलत पोस्चर में बैठते हैं या लंबे समय तक गर्दन झुकाकर मोबाइल देखते हैं, तो इन हड्डियों, नसों और डिस्क पर अत्यधिक दबाव पड़ता है. इसके परिणामस्वरूप गर्दन में खिंचाव, अकड़न और तेज दर्द शुरू हो जाता है. ध्यान न देने पर यह दर्द धीरे-धीरे कंधों, हाथों और उंगलियों तक फैलने लगता है. हाथों में झनझनाहट और सिर में भारीपन की शिकायत भी होने लगती है.
सर्वाइकल दर्द की मुख्य वजहें
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि दिनचर्या से जुड़ी कुछ छोटी-छोटी गलतियां इस समस्या को गंभीर बना देती हैं. कंप्यूटर या लैपटॉप पर काम करते वक्त गर्दन को आगे की ओर झुकाकर रखने से रीढ़ पर शरीर के सामान्य वजन से कई गुना अधिक दबाव पड़ता है. लगातार नीचे मुंह करके फोन चलाने की आदत मांसपेशियों में जकड़न पैदा करती है. बहुत ऊंचा या सख्त तकिया लगाना और गलत तरीके से सोना भी गर्दन की मांसपेशियों में ऐंठन का कारण बनता है. एक ही जगह घंटों बैठे रहने और अचानक भारी सामान उठाने से भी सर्वाइकल स्पाइन पर असर पड़ता है.
इस गंभीर समस्या से कैसे बचें?
काम करते समय कुर्सी पर सीधे बैठें और स्क्रीन का स्तर हमेशा अपनी आंखों के ठीक सामने रखें. घंटों लगातार काम न करें। हर आधे से एक घंटे में उठकर थोड़ा टहलें और गर्दन को हल्के से स्ट्रेच करें. सोते समय बहुत मोटे या ऊंचे तकिए के बजाय मध्यम और आरामदायक तकिए का इस्तेमाल करें. रोजाना गर्दन और कंधों की हल्की एक्सरसाइज करने से मांसपेशियां मजबूत और लचीली बनी रहती हैं. यदि सुबह उठते ही गर्दन घुमाने में अत्यधिक तकलीफ हो या हाथों में सुन्नता और कमजोरी महसूस होने लगे, तो इसे नजरअंदाज करने के बजाय तुरंत किसी हड्डी विशेषज्ञ या फिजियोथेरेपिस्ट से संपर्क करें.