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लंबे समय तक बैठे रहना पड़ सकता है भारी, नई रिसर्च में कैंसर का बढ़ा खतरा

नई रिसर्च में लंबे समय तक लगातार बैठे रहने को कैंसर के बढ़ते जोखिम से जोड़ा गया है. विशेषज्ञों ने नियमित व्यायाम के साथ दिनभर छोटे-छोटे मूवमेंट ब्रेक लेने की सलाह दी है, जो सेहत के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं.

Calendar Last Updated : 10 July 2026, 01:06 PM IST
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नई दिल्ली: अगर आपको लगता है कि रोज सुबह जिम जाकर, योग करके या तेज़ चाल से वॉक करके आपने अपनी सेहत की पूरी जिम्मेदारी निभा दी है, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है. आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लाखों लोग दिन का बड़ा हिस्सा ऑफिस की कुर्सी या घर के सामने लैपटॉप पर बैठे-बैठे बिताते हैं. नई रिसर्च बताती है कि अगर आप लगातार कई घंटों तक बैठे रहते हैं, तो नियमित एक्सरसाइज करने के बावजूद गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है. विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक बिना उठे बैठे रहना शरीर पर ऐसा असर डाल सकता है, जो भविष्य में कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के जोखिम को बढ़ा सकता है.

हाल ही में पीयर-रिव्यू जर्नल पीएलओएस मेडिसिन में प्रकाशित एक अध्ययन में लंबे समय तक बैठे रहने और कैंसर के बढ़ते खतरे के बीच संबंध पाया गया है. यह अध्ययन खासतौर पर उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जो दिनभर डेस्क जॉब करते हैं या लंबे समय तक पढ़ाई करने वाले छात्र हैं. शोधकर्ताओं ने 91 हजार से अधिक वयस्कों पर करीब 12 वर्षों तक अध्ययन किया. इसमें पाया गया कि जो लोग रोजाना लगातार 30 मिनट या उससे अधिक समय तक बिना उठे बैठे रहते हैं, उनमें कैंसर से जुड़ी जटिलताओं और मृत्यु का जोखिम धीरे-धीरे बढ़ता जाता है.

हर अतिरिक्त घंटा बढ़ा सकता है खतरा

अध्ययन के अनुसार, लंबे समय तक बैठे रहने का हर अतिरिक्त घंटा कैंसर से मृत्यु के खतरे को लगभग 10 प्रतिशत तक बढ़ा सकता है. हालांकि शोध में यह भी सामने आया कि यदि बैठने के समय को कम करके थोड़ी-थोड़ी शारीरिक गतिविधि की जाए, तो इस जोखिम को काफी हद तक घटाया जा सकता है. 

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि एक घंटे तक हल्की गतिविधि की जाए तो खतरा लगभग 12 प्रतिशत तक कम हो सकता है. वहीं 30 मिनट की मध्यम स्तर की एक्सरसाइज से जोखिम में करीब 8 प्रतिशत की कमी देखी गई. केवल पांच मिनट की तेज़ गतिविधि भी इस खतरे को लगभग 22 प्रतिशत तक कम करने में मददगार साबित हो सकती है.

केवल जिम जाना काफी नहीं

डॉक्टरों का कहना है कि नियमित व्यायाम करना आज भी बेहद जरूरी है. स्वास्थ्य विशेषज्ञ वयस्कों को हर सप्ताह 150 से 300 मिनट तक मध्यम स्तर की शारीरिक गतिविधि करने की सलाह देते हैं. लेकिन इसके साथ-साथ पूरे दिन शरीर को सक्रिय रखना भी उतना ही जरूरी है. एम्स, नई दिल्ली के विकिरण ऑन्कोलॉजी विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. अभिषेक शंकर के अनुसार, लगातार लंबे समय तक बैठे रहने की आदत शरीर में कई ऐसे बदलाव लाती है जो समय के साथ कैंसर के जोखिम को बढ़ा सकते हैं.

शरीर पर कैसे पड़ता है असर?

विशेषज्ञ बताते हैं कि जब कोई व्यक्ति लंबे समय तक लगातार बैठा रहता है, तो शरीर की मांसपेशियां कम सक्रिय हो जाती हैं. इससे शरीर में ग्लूकोज और फैट का संतुलन प्रभावित होता है. धीरे-धीरे इंसुलिन रेजिस्टेंस, वजन बढ़ना, हार्मोनल असंतुलन और शरीर में सूजन जैसी समस्याएं विकसित हो सकती हैं. 

इसके अलावा रक्त संचार भी प्रभावित होता है और प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर पड़ सकती है. इन सभी कारणों से समय के साथ कोलोरेक्टल, स्तन और गर्भाशय से जुड़े कुछ प्रकार के कैंसर का जोखिम बढ़ सकता है. हालांकि विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि केवल बैठना सीधे कैंसर का कारण नहीं बनता, बल्कि यह अन्य अस्वस्थ जीवनशैली की आदतों के साथ मिलकर जोखिम को बढ़ा सकता है.

रिसर्च क्या कहती है?

शोधकर्ताओं ने यह भी बताया कि यह एक अवलोकन आधारित अध्ययन है, इसलिए इससे सीधे कारण और परिणाम का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता. फिर भी इस अध्ययन की खास बात यह रही कि इसमें प्रतिभागियों की गतिविधियों को केवल सवाल-जवाब के आधार पर नहीं, बल्कि पहनने वाले डिजिटल उपकरणों के जरिए रिकॉर्ड किया गया. इससे अध्ययन के निष्कर्ष पहले के कई शोधों की तुलना में अधिक भरोसेमंद माने जा रहे हैं.

लंबे समय तक बैठने से कैसे बचें?

पीएसआरआई अस्पताल के वरिष्ठ ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. अमित उपाध्याय का कहना है कि केवल कुल बैठने का समय कम करना ही काफी नहीं है, बल्कि बीच-बीच में उठकर चलना भी बेहद जरूरी है. उनके अनुसार, हर 30 से 60 मिनट के बाद कुछ मिनट के लिए खड़े होकर टहलना चाहिए. यदि संभव हो तो स्टैंडिंग डेस्क का उपयोग करें.

फोन पर बात करते समय चलते रहें और कंप्यूटर पर किसी फाइल के खुलने या मीटिंग शुरू होने का इंतजार करते समय भी बैठे रहने के बजाय थोड़ा चलें. घर से काम करने वाले लोगों को इस आदत पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है, क्योंकि उनकी दिनभर की स्वाभाविक शारीरिक गतिविधि पहले से ही कम होती है.

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