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चीन ने नेपाल को दिया बैरियर झील फटने की चेतावनी

नेपाल-चीन बॉर्डर पर पिछले तीन दिनों से हालात बेहद खराब हैं और खतरा अभी टला नहीं है। 26 अगस्त को ग्लेशियर टूटने से नेपाल की भोटेकोशी नदी में अचानक बाढ़ आ गई और उसी सुबह चीन के ग्यिरोंग पोर्ट पर मडस्लाइड से रास्ता बंद हो गया।

Calendar Last Updated : 27 August 2026, 06:53 PM IST
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नई दिल्ली: नेपाल-चीन बॉर्डर पर पिछले तीन दिनों से हालात बेहद खराब हैं और खतरा अभी टला नहीं है। 26 अगस्त को ग्लेशियर टूटने से नेपाल की भोटेकोशी नदी में अचानक बाढ़ आ गई और उसी सुबह चीन के ग्यिरोंग पोर्ट पर मडस्लाइड से रास्ता बंद हो गया। अब वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि नदी के ऊपरी हिस्से में बनी नई झील अगले तीन दिनों में फट सकती है जिससे एक और तेज बाढ़ आ सकती है।

ग्लेशियर टूटने से कैसे आई भोटेकोशी में बाढ़   

नेपाल के हाइड्रोलॉजी और मौसम विज्ञान विभाग DHM ने साफ किया कि यह बाढ़ बारिश से नहीं आई। सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला कि लांगटांग लिरुंग के उत्तरी हिस्से से ग्लेशियर का बड़ा टुकड़ा करीब 5200 मीटर की ऊंचाई से टूटकर 1200 मीटर नीचे लेंडे नदी में गिरा, जो भोटेकोशी की सहायक नदी है।

बर्फ और चट्टानों ने घाटी में प्राकृतिक बांध बना दिया और फिर वह टूट गया। इसके बाद पानी, बर्फ और बड़े पत्थरों का कीचड़ भरा सैलाब रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग, गोरखा और चितवन की तरफ तेजी से बढ़ गया।

चीन में उसी दिन दूसरी आपदा, ग्यिरोंग पोर्ट पर 5 फीट तक कीचड़   

उसी सुबह चीन के शिजैंग में ग्यिरोंग पोर्ट के पास अलग मडस्लाइड हुई। यह पोर्ट नेपाल के साथ व्यापार का अहम रास्ता है। चीन के सरकारी चैनल CCTV ने बताया कि कई जगह 5 फीट से ज्यादा गहरा कीचड़ जमा हो गया, सड़कें और कम्युनिकेशन लाइनें कट गईं।

गुरुवार सुबह तक चीन में 3 लोगों की मौत और 558 लापता बताए गए जिसके बाद राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने बड़े स्तर पर रेस्क्यू का आदेश दिया। अभी यह साफ नहीं है कि मडस्लाइड और भोटेकोशी बाढ़ का सोर्स एक ही है या अलग।

क्या फिर आएगी बाढ़, बैरियर झील में 20 लाख क्यूबिक मीटर पानी   

सबसे बड़ा खतरा अभी बाकी है। चीन के जल संसाधन मंत्रालय के मुताबिक छोचेन खोला और पुरेपु त्सांगपो के संगम पर बैरियर झील बन गई है। गुरुवार सुबह तक उसमें 20 लाख क्यूबिक मीटर पानी जमा हो चुका था और वह ओवरफ्लो हो रही है।

अगले तीन दिनों में 30 लाख क्यूबिक मीटर पानी और आने की आशंका है। चीनी इंजीनियर सिमुलेशन कर रहे हैं और नेपाल ने भोटेकोशी, त्रिशूली और नारायणी किनारे रहने वाले लोगों को नदी से दूर रहने को कहा है।

पहली लहर कितनी बड़ी थी, 1985 की डिग त्शो से कई गुना ज्यादा   

DHM डेटा के मुताबिक बाढ़ बुधवार सुबह 9 बजे नेपाल में घुसी और दोपहर तक चितवन के देवघाट में 5850 क्यूबिक मीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से बह रही थी। देवघाट से करीब 20 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी गुजरा जो 1985 की एवरेस्ट क्षेत्र की डिग त्शो ग्लेशियल बाढ़ से कई गुना ज्यादा है। यह लहर कुछ घंटों में 170 किलोमीटर तक गई।

हिमालय में बार-बार क्यों हो रहा है ऐसा   

जुलाई 2025 के बाद 14 महीनों में इस इलाके में यह दूसरी बड़ी बाढ़ है। ICIMOD के मुताबिक 2005 के बाद हिमालयी ग्लेशियल झीलों की संख्या 1900 से बढ़कर 2600 से ज्यादा हो गई है। ग्लोबल वार्मिंग से यह क्षेत्र तेजी से गर्म हो रहा है इसलिए ऐसी विनाशकारी बाढ़ें आम होती जा रही हैं।

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