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ऐतिहासिक युद्धविराम के बाद अमेरिका में घिरे ट्रंप, G7 समिट में पुराने बयान ने बढ़ाई मुश्किलें

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने ही देश में राजनीतिक विरोध और आलोचनाओं के घेरे में आ गए हैं. फ्रांस के एवियन-लेस-बैंस में चल रहे प्रतिष्ठित G7 शिखर सम्मेलन के दौरान यह मामला हुआ.

Calendar Last Updated : 19 June 2026, 12:10 PM IST
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नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच पिछले चार महीनों से चल रहा भीषण युद्ध आखिरकार एक शांति समझौते के साथ समाप्त हो गया है. हालांकि, इस ऐतिहासिक युद्धविराम के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने ही देश में राजनीतिक विरोध और आलोचनाओं के घेरे में आ गए हैं. फ्रांस के एवियन-लेस-बैंस में चल रहे प्रतिष्ठित G7 शिखर सम्मेलन के दौरान यह मामला उस समय और गरमा गया, जब लाइव प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक पत्रकार ने ट्रंप को उन्हीं का साल 2020 का एक पुराना सोशल मीडिया पोस्ट याद दिला दिया.

लाइव प्रेस कॉन्फ्रेंस में तीखी बहस

G7 समिट के दौरान आयोजित एक लाइव प्रेस कॉन्फ्रेंस में उस समय बेहद दिलचस्प और असहज स्थिति पैदा हो गई, जब फॉक्स न्यूज के वरिष्ठ संवाददाता पीटर डूसू ने ट्रंप से इस समझौते की शर्तों पर सीधे सवाल किए. डूसू ने ट्रंप को याद दिलाते हुए कहा, जनवरी 2020 में एक बेहद समझदार व्यक्ति ने कहा था कि ईरान कभी कोई युद्ध नहीं जीता, लेकिन उसने कभी कोई बातचीत भी नहीं हारी. इस बात पर डोनाल्ड ट्रंप ने पत्रकार को बीच में ही टोकते हुए पूछा, ऐसा किसने कहा था? पत्रकार पीटर डूसू ने तुरंत जवाब दिया, यह आपने ही कहा था.

समझौते की आलोचना

इस शांति समझौते को लेकर अमेरिका में विपक्षी सांसदों और विश्लेषकों का मानना है कि जो बाइडन प्रशासन के बाद सत्ता में आए ट्रंप ने इस डील में ईरान को जरूरत से ज्यादा रियायतें दे दी हैं और बदले में अमेरिका को ठोस हासिल नहीं हुआ है. डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि मैं तीन-चार हफ्ते और इस युद्ध को जारी रखता, तो यही आलोचक कहते कि मैंने इसे बहुत लंबा खींच दिया. पत्रकार के सवालों का जवाब देते हुए ट्रंप ने अमेरिकी मीडिया और अपने आलोचकों पर तीखा निशाना साधा. उन्होंने कहा कि मीडिया हर परिस्थिति में उनके फैसलों को गलत ही दिखाएगा. ट्रंप ने तर्क दिया कि अगर ईरान सफेद झंडा फहराकर पूरी तरह आत्मसमर्पण भी कर देता, तब भी न्यूयॉर्क टाइम्स और CNN इसे 'ईरान की ही जीत' बताते.

क्या था साल 2020 का वह चर्चित पोस्ट?

डोनाल्ड ट्रंप ने यह चर्चित बयान 3 जनवरी 2020 को तत्कालीन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया था. वह वह दौर था जब अमेरिकी हवाई हमले में ईरानी जनरल कासिम सुलेमानी के मारे जाने के बाद दोनों देशों के बीच युद्ध जैसी स्थिति बन गई थी. आज चार साल बाद, जब ट्रंप खुद ईरान के साथ शांति समझौते की मेज पर बैठे हैं, तो उनके अपने ही पुराने शब्द उनके सामने चुनौती बनकर खड़े हो गए हैं.

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