menu-icon
The Bharatvarsh News

FCRA बिल पर ट्रंप के सांसद का भारत पर निशाना, बोले- 'ईसाई समुदाय पर सीधा हमला'

अमेरिकी सांसद राइली मूर ने भारत के प्रस्तावित FCRA संशोधन को ईसाई समुदाय पर हमला बताते हुए इसकी आलोचना की है. उन्होंने चेतावनी दी कि बिल के मौजूदा प्रावधान भारत-अमेरिका के द्विपक्षीय रिश्तों के लिए चिंता का विषय बन सकते हैं.

Calendar Last Updated : 05 August 2026, 03:01 PM IST
Share:

नई दिल्ली: भारत में FCRA संशोधन बिल 2026 को लेकर संसद में बहस के बीच अमेरिका के एक सांसद की टिप्पणी ने विवाद बढ़ा दिया है. डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के सांसद राइली मूर ने प्रस्तावित बदलावों पर चिंता जताते हुए इसे ईसाई समुदाय के खिलाफ कदम बताया है. उन्होंने चेतावनी दी कि इस कानून का असर भारत-अमेरिका के रिश्तों पर भी पड़ सकता है.

राइली मूर ने क्या कहा?

अमेरिकी कांग्रेस सदस्य राइली मूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भारत के FCRA कानून में प्रस्तावित बदलावों को लेकर अपनी बात रखी. उन्होंने भारत में ईसाई समुदाय के पुराने इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि देश में ईसाई धर्म की मौजूदगी सदियों पुरानी है.

 

इसके बाद उन्होंने आरोप लगाया कि प्रस्तावित संशोधन सरकार को चर्चों और धार्मिक संस्थाओं पर ज्यादा नियंत्रण देने की दिशा में ले जा सकते हैं. मूर ने इसे “ईसाई समुदाय पर सीधा हमला” बताते हुए कहा कि अगर बिल इसी रूप में आगे बढ़ता है, तो यह भारत-अमेरिका के द्विपक्षीय संबंधों में चिंता का विषय बन सकता है.

FCRA बिल में क्या बदलाव प्रस्तावित हैं?

फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) एक्ट, 2010 के तहत NGO, धार्मिक संस्थाओं, ट्रस्ट और अन्य संगठनों को विदेश से मिलने वाले चंदे के लिए नियमों का पालन करना पड़ता है. प्रस्तावित संशोधन इन फंडों की निगरानी और इस्तेमाल से जुड़े नियमों को और सख्त करने की बात करता है.

बिल में एक नामित प्राधिकारी बनाने का प्रस्ताव है, जिसे विदेशी चंदे और उससे बनी संपत्तियों के प्रबंधन से जुड़ी शक्तियां मिल सकती हैं. इसके अलावा FCRA रजिस्ट्रेशन के नवीनीकरण के लिए विदेशी योगदान के न्यूनतम इस्तेमाल की शर्त भी प्रस्तावित है.

क्यों हो रहा है विरोध?

विपक्षी दलों, कुछ NGO और सिविल सोसाइटी संगठनों का कहना है कि नए प्रावधानों से केंद्र सरकार को विदेशी फंड हासिल करने वाले संगठनों पर अधिक नियंत्रण मिल सकता है.

धार्मिक संस्थाओं को यह भी डर है कि रजिस्ट्रेशन रद्द होने की स्थिति में विदेशी फंड से बनी स्कूल, अस्पताल और दूसरी संपत्तियां सरकारी नियंत्रण में जा सकती हैं. वहीं, सरकार का कहना है कि संशोधनों का उद्देश्य पारदर्शिता, जवाबदेही और विदेशी फंड के सही इस्तेमाल को सुनिश्चित करना है.

Tags :

सम्बंधित खबर

Recent News