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नई दिल्ली: मध्य अमेरिकी देश ग्वाटेमाला में स्थित फ्यूगो ज्वालामुखी के दोबारा एक्टिव होने के बाद प्रशासन ने पूरे देश में ऑरेंज अलर्ट जारी कर दिया है. सोमवार सुबह शुरू हुई ज्वालामुखीय गतिविधि शाम तक काफी तेज हो गई, जिसके बाद आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का अभियान शुरू कर दिया गया. अधिकारियों का कहना है कि ज्वालामुखी से निकल रही गर्म राख, गैस और लावा आसपास के क्षेत्रों के लिए बड़ा खतरा बन गए हैं.
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन एजेंसी कॉनरेड के अनुसार, फ्यूगो ज्वालामुखी से राख का विशाल गुबार लगभग छह किलोमीटर की ऊंचाई तक पहुंच रहा है, जबकि लावा लगातार इसकी ढलानों से नीचे बह रहा है. वहीं स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राजधानी ग्वाटेमाला सिटी से करीब 35 किलोमीटर दूर स्थित ज्वालामुखी के आसपास के दो गांवों को खाली कराया जा रहा है.
कॉनरेड की प्रवक्ता वेलेरिया उरिजार ने नागरिकों से अपील की है कि अगर प्रशासन निकासी के निर्देश जारी करे तो बिना देरी किए सुरक्षित स्थानों की ओर चले जाएं. उन्होंने लोगों से आपातकालीन स्थिति के लिए आवश्यक सामान तैयार रखने और परिवार के सुरक्षा प्लान को एक्टिव रखने की भी सलाह दी है. वहीं देश के ज्वालामुखी विज्ञान संस्थान ने चेतावनी दी है कि फ्यूगो ज्वालामुखी अधिक विस्फोटक चरण में प्रवेश कर सकता है. विशेष रूप से इसके पश्चिमी और दक्षिणी हिस्सों में रहने वाले लोगों को गर्म ज्वालामुखीय मलबे और राख के तेज बहाव से सतर्क रहने को कहा गया है.
इसके साथ ही सुरक्षा के मद्देनजर अधिकारियों ने लास लाजास क्षेत्र की ओर जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग RN-14 को बंद कर दिया है. इसके अलावा प्रभावित इलाकों के कई स्कूलों में ऑफलाइन कक्षाएं भी अस्थायी रूप से निलंबित कर दी गई हैं. पर्वतीय मार्गों पर भी यातायात रोक दिया गया है, जिससे कई क्षेत्रों का संपर्क प्रभावित हुआ है.
दरअसल, ग्वाटेमाला प्रशांत महासागर के 'रिंग ऑफ फायर' क्षेत्र में स्थित है, जहां भूकंप और ज्वालामुखीय गतिविधियां अक्सर होती रहती हैं. इससे पहले 2023 में भी फ्यूगो ज्वालामुखी के एक्टिव होने पर करीब 1,200 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया था. वहीं, 2018 में हुए भीषण विस्फोट में 215 लोगों की मौत हुई थी और कई अन्य लोग लापता हो गए थे.