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रैपिडो राइड खत्म होते ही ड्राइवर ने महिला यात्री को किया मैसेज 'कोई वैकेंसी हो तो बताना', वायरल हुई पोस्ट

ऑफिस पहुंचने के कुछ ही देर बाद जब एक महिला यात्री के व्हाट्सऐप पर मैसेज की घंटी बजी, तो उसने एक आम संदेश की उम्मीद की थी। हालांकि, स्क्रीन पर दिख रहे शब्दों ने उसकी सोच और भावना दोनों को गहराई से झकझोर दिया।

Calendar Last Updated : 04 August 2026, 05:41 PM IST
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नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में आए दिन सफर के दौरान कई तरह के किस्से सुनने को मिलते हैं, लेकिन एक रैपिडो राइड ने सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। ऑफिस पहुंचने के कुछ ही देर बाद जब एक महिला यात्री के व्हाट्सऐप पर मैसेज की घंटी बजी, तो उसने एक आम संदेश की उम्मीद की थी। हालांकि, स्क्रीन पर दिख रहे शब्दों ने उसकी सोच और भावना दोनों को गहराई से झकझोर दिया। कई लोगों ने अपने व्यक्तिगत नेटवर्क में भी इस जानकारी को प्रसारित करने का भरोसा दिया है, जिससे युवक को जल्द ही इंटरव्यू का बुलावा आने की संभावना बढ़ गई है।

उम्मीद की नई किरण और डिजिटल क्रांति

जनता के भारी समर्थन को देखते हुए महिला यात्री ने बाद में एक नया अपडेट साझा किया। उसने बताया कि ड्राइवर का रिज्यूमे और संपर्क विवरण कई कंपनियों के एचआर पेशेवरों तथा परिचितों तक पहुंचा दिया गया है। 

यह घटना स्पष्ट करती है कि आज के दौर में उच्च शिक्षा के बावजूद मुकाम पाना आसान नहीं है, मगर हिम्मत और सही सोच से रास्ते निकाले जा सकते हैं। इस किस्से ने यह साबित कर दिखाया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि जरूरतमंदों के लिए संभावनाओं का एक मजबूत पुल भी बन सकते हैं।

व्हाट्सऐप मैसेज से शुरू हुआ सफर

मैसेज भेजने वाला वही ड्राइवर था जिसने महिला को कुछ देर पहले उसकी मंजिल तक छोड़ा था। उसने विनम्रता से अपना परिचय हाल ही में बीटेक की पढ़ाई पूरी करने वाले एक युवा के रूप में दिया। उसने बताया कि वह अपने करियर की पहली नौकरी पाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। बिना किसी झिझक के उसने गुहार लगाई कि यदि महिला की नज़र में कोई वैकेंसी हो, तो उसे अवसर दिया जाए। 

युवक की इस बेझिझक लगन और ईमानदारी से महिला यात्री इतनी प्रभावित हुई कि उसने इस पूरे वाक्ये को सोशल मीडिया पर साझा कर दिया। देखते ही देखते यह पोस्ट इंटरनेट की दुनिया में तेजी से फैल गई और हजारों लोग इस पर अपनी राय देने लगे। इस घटना ने अचानक ही देश में रोजगार के संघर्ष, कड़ी मेहनत और आत्मसम्मान से जुड़ी एक गंभीर बहस को जन्म दे दिया। लोगों का मानना था कि उसने किसी के आगे गिड़गिड़ाने के बजाय अपनी काबिलियत के दम पर मौका मांगा है, जो उसकी दृढ़ इच्छाशक्ति को दर्शाता है।

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