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नई दिल्ली: अमेरिका में ईरान को लेकर अपनाई गई राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीति पर जनता की राय अब खुलकर सामने आने लगी है. एक हालिया सर्वेक्षण ने संकेत दिया है कि बड़ी संख्या में अमेरिकी नागरिक ईरान के साथ हुए संघर्ष और उससे जुड़ी रणनीति को लेकर पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं. इतना ही नहीं, युद्धविराम समझौते की सफलता और स्थायित्व को लेकर भी लोगों के मन में कई सवाल बने हुए हैं. सर्वे के आंकड़े ट्रंप प्रशासन के लिए चिंता बढ़ाने वाले माने जा रहे हैं.
रॉयटर्स और इप्सोस द्वारा किए गए एक ताजा सर्वेक्षण में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की लोकप्रियता में गिरावट दर्ज की गई है. सर्वे के अनुसार, उनकी एप्रूवल रेटिंग घटकर 34 प्रतिशत पर पहुंच गई है, जो उनके दूसरे कार्यकाल के दौरान दर्ज सबसे कम स्तरों में से एक मानी जा रही है. गौरतलब है कि जब ट्रंप ने अपने मौजूदा कार्यकाल की शुरुआत की थी, तब उनकी एप्रूवल रेटिंग कहीं अधिक थी. हालांकि समय के साथ विभिन्न घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों ने उनकी लोकप्रियता को प्रभावित किया है.
सर्वे में शामिल लोगों से ईरान के साथ हुए संघर्ष पर भी राय मांगी गई. आंकड़ों से पता चलता है कि केवल एक सीमित वर्ग ही इस युद्ध को उचित मानता है. काफी संख्या में लोगों का मानना है कि युद्ध से अमेरिका को अपेक्षित लाभ नहीं मिला. कई उत्तरदाताओं ने कहा कि संघर्ष के बाद अमेरिका की वैश्विक स्थिति पहले की तुलना में मजबूत होने के बजाय कमजोर हुई है. वहीं कुछ लोगों ने माना कि हालात में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया. दिलचस्प बात यह रही कि रिपब्लिकन समर्थकों के बीच भी इस मुद्दे पर पूरी एकजुटता नजर नहीं आई. पार्टी के समर्थकों की राय भी अलग-अलग देखने को मिली.
ईरान और अमेरिका के बीच हुए युद्धविराम समझौते को लेकर भी लोगों का भरोसा कमजोर दिखाई दिया. सर्वे में बड़ी संख्या में अमेरिकियों ने माना कि यह समझौता दोनों देशों के बीच लंबे समय तक शांति कायम रखने के लिए पर्याप्त नहीं हो सकता. डेमोक्रेट और रिपब्लिकन दोनों ही खेमों में ऐसे लोगों की संख्या काफी रही, जिन्हें समझौते की सफलता पर संदेह है.
वहीं केवल सीमित संख्या में लोगों ने उम्मीद जताई कि यह समझौता भविष्य में स्थायी शांति का रास्ता खोल सकता है. विश्लेषकों का मानना है कि लंबे समय से चले आ रहे तनाव और परमाणु कार्यक्रम से जुड़े विवादों के कारण लोगों के मन में भरोसा बनना आसान नहीं है.
विदेश नीति के अलावा अमेरिका के भीतर बढ़ती महंगाई और जीवन-यापन की लागत भी ट्रंप प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है. सर्वे में आर्थिक मुद्दों को लेकर लोगों की नाराजगी स्पष्ट दिखाई दी. कई नागरिकों का मानना है कि रोजमर्रा की जरूरतों पर बढ़ता खर्च उनकी सबसे बड़ी चिंता है. इसी कारण आर्थिक मामलों पर राष्ट्रपति को अपेक्षित समर्थन नहीं मिल रहा है.
ट्रंप की आव्रजन नीति लंबे समय से चर्चा का विषय रही है. हालांकि ताजा सर्वेक्षण के अनुसार इस मुद्दे पर भी उनकी लोकप्रियता में गिरावट देखने को मिली है. विशेषज्ञों का कहना है कि विदेश नीति, आर्थिक चुनौतियां और आव्रजन जैसे मुद्दे आने वाले समय में अमेरिकी राजनीति को प्रभावित कर सकते हैं. ऐसे में ट्रंप प्रशासन के लिए जनता का भरोसा दोबारा मजबूत करना एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है.