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DNA टेस्ट बना उम्मीद की डोर, 23 साल बाद बेटी ने खोज लिए अपने असली माता-पिता

DNA जांच की मदद से अपने असली माता-पिता को खोज लिया. पहली बार जन्म देने वाली मां से मिलीं, जन्म के बाद परिवार से बिछड़ी युवती ने 23 साल बाद

Calendar Last Updated : 07 August 2026, 05:59 PM IST
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नई दिल्ली: कुछ कहानियां ऐसी होती हैं, जो यह एहसास दिलाती हैं कि समय कितना भी बीत जाए, अपनों से मिलने की उम्मीद कभी खत्म नहीं होती. स्वीडन में पली-बढ़ी 23 वर्षीय लीसा की कहानी भी ऐसी ही है. जन्म के तुरंत बाद अपने परिवार से बिछड़ने वाली लीसा ने करीब 23 साल बाद चीन लौटकर अपने असली माता-पिता को खोज निकाला. जब वह पहली बार अपनी जन्म देने वाली मां से मिलीं, तो यह पल वहां मौजूद हर व्यक्ति के लिए काफी भावुक था.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, लीसा का जन्म वर्ष 2003 में चीन के अनहुई प्रांत में हुआ था. उस समय उनका नाम गाओ जियानक्वान था. आर्थिक तंगी से जूझ रहे उनके माता-पिता ने जन्म के कुछ समय बाद उन्हें एक दाई की देखभाल में सौंप दिया. लेकिन कुछ दिनों बाद बच्ची को एक खेल स्टेडियम के पास छोड़ दिया गया, जहां से स्थानीय अधिकारियों ने उसे सुरक्षित बरामद किया.

जांच के दौरान पता चला कि बच्ची को कुछ स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी थीं. इसके बाद उसे एक बाल कल्याण केंद्र भेजा गया, जहां उसका पालन-पोषण शुरू हुआ. करीब एक वर्ष की उम्र में स्वीडन के एक दंपति ने कानूनी प्रक्रिया पूरी कर उसे गोद लिया और वह उनके साथ स्वीडन चली गई.

DNA जांच से मिला परिवार का सुराग

बचपन से ही लीसा अपने असली परिवार और जन्म से जुड़े सवालों के जवाब तलाशना चाहती थीं. उनके स्वीडिश माता-पिता ने भी इस इच्छा का पूरा सम्मान किया और हर कदम पर उनका साथ दिया. मार्च 2026 में लीसा ने चीन की संस्था ‘बेबी कम होम’ से संपर्क किया, जो बिछड़े परिवारों को मिलाने का काम करती है. संस्था ने DNA परीक्षण की मदद से लीसा के जैविक परिवार की पहचान कर ली. इसके बाद उनके वर्षों पुराने इंतजार का अंत हुआ और परिवार से मिलने की तैयारी शुरू हुई.

लीसा अपने स्वीडिश माता-पिता के साथ चीन के अनहुई प्रांत पहुंचीं, जहां उनका परिवार बेसब्री से इंतजार कर रहा था. स्वागत के लिए एक विशेष बैनर लगाया गया था, जिस पर लिखा था कि दुनिया का सबसे सुंदर रास्ता अपने घर लौटने का रास्ता होता है. अपनी मां को सामने देखते ही लीसा खुद को रोक नहीं सकीं और उन्हें गले लगाकर भावुक हो गईं. उनकी मां ने उन्हें पारंपरिक लाल किपाओ पहनाया और जेड से बना उपहार भी भेंट किया. लीसा ने कहा कि अपने अतीत और अपनी जड़ों को जानना उनके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण सपना था. 

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