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नई दिल्ली: ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव अब समुद्री रास्तों तक पहुंच गया है. यमन के हूती विद्रोहियों के हमले ने लाल सागर के आसपास हालात और गंभीर कर दिए हैं. बाब अल-मंदेब स्ट्रेट के पास एक कमर्शियल जहाज को निशाना बनाए जाने की खबर है.
इस हमले में जहाज के चार क्रू सदस्यों की जान चली गई. वहीं, बचाव अभियान में पहुंचे हूती विरोधी गुट के दो यमनी रेस्क्यूकर्मी भी मारे गए. यह घटना ईरान-अमेरिका संघर्ष शुरू होने के बाद समुद्री जहाजों पर हूती हमले से जुड़ी सबसे गंभीर घटनाओं में से एक मानी जा रही है.
यमन के परिवहन मंत्रालय के अनुसार, मिस्र के स्वामित्व वाले छोटे कार्गो जहाज ‘तिहामा’ को बाब अल-मंदेब के नजदीक निशाना बनाया गया. हूती समर्थित मीडिया का दावा है कि उनका निशाना सऊदी अरब से जुड़े एक जहाज पर था, जिस पर कथित तौर पर सैन्य सामान ले जाया जा रहा था.
बाब अल-मंदेब दुनिया के महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में शामिल है. यह लाल सागर को अदन की खाड़ी और आगे हिंद महासागर से जोड़ता है. इसलिए यहां किसी भी तरह की सैन्य गतिविधि का असर अंतरराष्ट्रीय शिपिंग पर पड़ सकता है.
इसी बीच अमेरिका ने भी समुद्री मोर्चे पर कार्रवाई की. अमेरिकी सेना के मुताबिक, पनामा के झंडे वाला एक कार्गो जहाज ईरानी बंदरगाहों पर लगाए गए अमेरिकी प्रतिबंधों को कथित तौर पर तोड़कर आगे बढ़ रहा था. इसके बाद अमेरिकी नौसेना के हेलिकॉप्टर ने जहाज के स्टीयरिंग सिस्टम को निशाना बनाया. घटना में किसी के हताहत होने की जानकारी नहीं है.
दूसरी ओर, ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अपना रुख और कड़ा कर दिया है. ईरानी सुरक्षा अधिकारी मोहसिन रेजाई के मुताबिक, जब तक अमेरिका ईरान की मांगों को स्वीकार नहीं करता, तब तक इस रणनीतिक समुद्री मार्ग को शिपिंग के लिए खोलने की संभावना नहीं है. ईरान चाहता है कि अमेरिका अपना रुख बदले और विदेशों में फ्रीज की गई ईरानी संपत्तियों को जारी करने समेत उसकी अन्य शर्तों पर सहमति बनाए.
होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम है. इसके बंद रहने से समुद्री व्यापार, तेल की सप्लाई और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर दबाव और बढ़ सकता है. ईरान-अमेरिका तनाव के बीच अब समुद्री मोर्चा भी संघर्ष का बड़ा केंद्र बनता दिख रहा है.