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नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सुरक्षा को लेकर एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है. बता दें, द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई में नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान ईरान से ट्रंप को संभावित खतरे की खुफिया जानकारी अमेरिकी एजेंसियों को मिली थी. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि खतरा इतना गंभीर था कि ट्रंप को तुर्की से सुरक्षित निकालने के लिए एक गुप्त योजना तैयार की गई. क्या थी वो गुप्त योजना चलिए जानते है.
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी अधिकारियों को अलग-अलग खुफिया स्रोतों से जानकारी मिली थी कि ट्रंप के विमान को जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइल से निशाना बनाए जाने का खतरा है. अधिकारियों के मुताबिक, नाटो सम्मेलन के आसपास एक व्यक्ति को कंधे से दागी जाने वाली मिसाइल के साथ भी देखा गया था.
इतना ही नहीं, खुफिया जानकारी में यह भी सामने आया कि ईरान से जुड़े लोगों को अंकारा में ट्रंप के ठहरने की जगह के बारे में जानकारी थी. उन्हें यह तक पता होने की बात कही गई कि राष्ट्रपति किस इमारत की किस मंजिल पर मौजूद थे. हालांकि, इन दावों में कितनी सच्चाई है इसको लेकर फिलहाल पुष्टि नहीं हो पाई है.
जानकारी के अनुसार, खतरे की गंभीरता को देखते हुए ट्रंप की तुर्की से वापसी का तरीका बेहद गोपनीय रखा गया. सार्वजनिक तौर पर ट्रंप अपने निर्धारित एयर फोर्स वन विमान में सवार होते दिखाई दिए थे. लेकिन इसके बाद उन्हें गुपचुप तरीके से एक एयरपोर्ट कैटरिंग वाहन के जरिए दूसरी जगह पहुंचाया गया. वहां से अमेरिकी राष्ट्रपति को एक सैन्य विमान में बैठाकर तुर्की से बाहर ले जाया गया. यह पूरी कवायद इसलिए की गई ताकि संभावित हमले का खतरा कम किया जा सके और ट्रंप की वास्तविक यात्रा योजना को गोपनीय रखा जा सके.
डोनाल्ड ट्रंप इससे पहले भी हत्या के प्रयासों का सामना कर चुके हैं. 2024 में पेंसिल्वेनिया के बटलर में चुनावी रैली के दौरान उन पर गोली चलाई गई थी, जिस दौरान वह घायल हो गए थे. इसके कुछ समय बाद फ्लोरिडा स्थित उनके गोल्फ क्लब के पास भी एक हथियारबंद व्यक्ति को पकड़ा गया था. हालांकि, इन दोनों घटनाओं को ईरान से जुड़े मौजूदा खतरे से जोड़ने का कोई प्रमाण सामने नहीं आया है. हालांकि ट्रंप की सुरक्षा को लेकर चिंता लगातार बनी हुई है.