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नई दिल्ली: अमेरिका ने वेनेजुएला के खिलाफ कार्रवाई के दौरान जब्त किए गए दो प्रतिबंधित तेल टैंकरों को अब कबाड़ में बेच दिया है. खास बात यह है कि इन जहाजों का अंतिम ठिकाना भारत का शिप-ब्रेकिंग यार्ड होगा, जहां इन्हें तोड़कर स्क्रैप में बदला जाएगा. 'लॉयड लिस्ट' की रिपोर्ट में इस पूरी डील से जुड़ी जानकारी सामने आई है.
रिपोर्ट के अनुसार, दुबई स्थित जहाज रीसाइक्लिंग कंपनी 'ग्लोबल मार्केटिंग सिस्टम्स' (GMS) ने पिछले महीने दोनों टैंकर खरीदे हैं. हालांकि, अमेरिकी सरकार ने इन जहाजों को किस कीमत पर बेचा, इसका खुलासा अभी नहीं किया गया है. बेचे गए दोनों टैंकरों में पहला जहाज 'एरा' है. इसे पहले 'मरीनेरा' और 'बेला 1' के नाम से भी जाना जाता था. दूसरा जहाज 'लीलेओ' है, जो इससे पहले 'गैलीलियो' और 'वेरोनिका' नाम से चल चुका है. दोनों जहाज पहले से ही अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में थे.
अब इन दोनों जहाजों को भारत लाकर शिप-ब्रेकिंग यार्ड में नष्ट किया जाएगा. GMS के सीईओ अनिल शर्मा ने 'लॉयड लिस्ट' से बातचीत में बताया कि इन टैंकरों की बिक्री अमेरिकी सरकार ने की है और इसे लेकर अदालत की मंजूरी भी मिली थी. उन्होंने यह भी कहा कि इस सौदे में कुछ परेशानियां हैं. इनमें सबसे बड़ी समस्या यह है कि कंपनी को इन जहाजों के पिछले मालिक के बारे में पूरी जानकारी नहीं थी.
अमेरिकी कोस्ट गार्ड और सैन्य विशेष बलों ने जनवरी में आइसलैंड के दक्षिणी समुद्री क्षेत्र से रूसी झंडे वाले 'एरा' टैंकर को कब्जे में लिया था. अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, जहाज ने वेनेजुएला से तेल निर्यात रोकने के लिए कैरेबियन क्षेत्र में लगाई गई अमेरिकी नाकाबंदी से बचने की कोशिश की थी.
अमेरिका का आरोप था कि 'एरा' का इस्तेमाल वेनेजुएला और ईरान से प्रतिबंधित तेल की ढुलाई के लिए किया जा रहा था. वहीं, जनवरी में ही अमेरिकी एजेंसियों ने कैरेबियन सागर से 'लीलेओ' नाम के दूसरे रूसी झंडे वाले टैंकर को भी जब्त किया था. यह जहाज रूस पर लगाए गए अमेरिकी प्रतिबंधों के तहत था.
अमेरिकी कार्रवाई के बाद सामने आया कि वेनेजुएला से जुड़े अभियान में कम से कम 10 तेल टैंकरों को कब्जे में लिया गया था. प्रतिबंधों और जांच से बचने के लिए ऐसे जहाज अक्सर अपना नाम बदलते रहते हैं, जिससे उनकी पहचान छिपाने की कोशिश की जाती है.