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संसद में घिरे ट्रंप! अमेरिकी सीनेट ने बांधे राष्ट्रपति के हाथ, ईरान से सेना वापस बुलाने का प्रस्ताव भारी बहुमत से पास

ट्रंप के लिए सबसे बड़ा झटका यह रहा कि उनकी अपनी ही रिपब्लिकन पार्टी के 4 सांसदों ने पाला बदलकर विपक्षी डेमोक्रेट्स के पक्ष में मतदान किया.

Calendar Last Updated : 04 June 2026, 09:50 AM IST
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नई दिल्ली: अमेरिकी राजनीति में बुधवार को एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला. विपक्ष के नियंत्रण वाली हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित कर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से ईरान युद्ध से अमेरिकी सैनिकों को तुरंत वापस बुलाने की मांग की. यह प्रस्ताव 208 के मुकाबले 215 मतों के मामूली अंतर से पास हुआ.

ट्रंप को लगा बड़ा झटका

ट्रंप के लिए सबसे बड़ा झटका यह रहा कि उनकी अपनी ही रिपब्लिकन पार्टी के 4 सांसदों ने पाला बदलकर विपक्षी डेमोक्रेट्स के पक्ष में मतदान किया. आगामी राजनीतिक परिदृश्य को देखते हुए इसे राष्ट्रपति ट्रंप के लिए एक बड़ा रणनीतिक और नैतिक झटका माना जा रहा है.

डेमोक्रेट्स का कड़ा रुख 

प्रस्ताव पारित होने के बाद डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं ने आक्रामक रुख अपनाते हुए कहा कि यह अमेरिकी जनता की ओर से व्हाइट हाउस को एक सीधा और साफ संदेश है. लगभग तीन महीने पहले शुरू हुए इस सैन्य संघर्ष के बाद यह पहला मौका है जब रिपब्लिकन समर्थित सरकार के खिलाफ हाउस ने इतनी मजबूती से कोई प्रस्ताव पास किया है. डेमोक्रेट्स इसे अमेरिकी संसद  की संवैधानिक शक्तियों को पुनर्जीवित करने और राष्ट्रपति की एकतरफा सैन्य कार्रवाइयों पर अंकुश लगाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम मान रहे हैं.

वॉर पॉवर्स एक्ट तोड़ने का आरोप

इस पूरे विवाद की शुरुआत अमेरिका के 'वॉर पॉवर्स एक्ट' से होती है. विपक्षी सांसदों का कहना है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने कांग्रेस को बताए बिना और उसकी जरूरी अनुमति के बिना इजरायल के साथ मिलकर ईरान पर सैन्य हमले किए. इस कानून के अनुसार राष्ट्रपति को किसी भी सैन्य कार्रवाई के लिए 60 दिनों के भीतर कांग्रेस से मंजूरी लेनी होती है. लेकिन इसकी समय सीमा पहले ही बीत चुकी है. ट्रंप प्रशासन का दावा है कि मुख्य लड़ाई तो पहले ही खत्म हो गई है लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि दोनों पक्षों के बीच अभी भी गोलाबारी और हमले हो रहे हैं.

सीनेट की राह और वीटो की समस्या

प्रतिनिधि सभा से पास होने के बाद यह प्रस्ताव अब अमेरिकी संसद के ऊपरी सदन यानी सीनेट में जाएगा. सीनेट में रिपब्लिकन पार्टी का बहुमत है. लेकिन संभावना है कि यह प्रस्ताव इसी सप्ताह सीनेट से भी पारित हो सकता है. अगर ऐसा होता है तो राष्ट्रपति ट्रंप अपनी विशेष शक्तियों का उपयोग करके इस पर 'वीटो' लगा देंगे. आगामी नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों को देखते हुए रिपब्लिकन सांसदों के बीच भी डर बढ़ने लगा है. लंबा युद्ध उनके चुनाव परिणामों पर असर डाल सकता है.

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