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Courtesy: AI generated
नई दिल्ली: जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर हुए घातक हमले के बाद अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है. हमले में अमेरिकी सैनिकों की मौत के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कड़ा रुख अपनाया है.
इसके बाद अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी है. बढ़ते तनाव को देखते हुए अमेरिका ने दुनिया भर में रह रहे अपने नागरिकों के लिए भी सुरक्षा एडवाइजरी जारी की है.
अमेरिकी सेना के अनुसार, जॉर्डन स्थित एक सैन्य बेस पर ड्रोन और मिसाइलों से हमला किया गया. इस हमले में दो अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई, जबकि चार अन्य गंभीर रूप से घायल हुए हैं. इसके अलावा एक सैनिक के लापता होने की भी जानकारी सामने आई है. इस घटना के बाद अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हो गई हैं.
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सैनिकों की मौत पर गहरा दुख जताते हुए कहा कि देश अपने जवानों के बलिदान को कभी नहीं भूलेगा. उन्होंने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए दोहराया कि अमेरिका किसी भी स्थिति में ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा. ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेना अपने नागरिकों और सैनिकों की सुरक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएगी.
हमले के बाद अमेरिकी सेना ने ईरान से जुड़े कई सैन्य ठिकानों पर हवाई अभियान शुरू कर दिया है. अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक इस कार्रवाई का उद्देश्य क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय व्यापार और समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना तथा उन ठिकानों को निशाना बनाना है, जिन पर हमले की योजना बनाने का आरोप है. माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में यह अभियान और व्यापक हो सकता है.
बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने वैश्विक ट्रैवल एडवाइजरी जारी की है. इसमें विदेशों में रह रहे अमेरिकी नागरिकों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने, भीड़भाड़ वाले इलाकों से बचने और स्थानीय प्रशासन के सुरक्षा निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है. साथ ही दूतावासों और अन्य अमेरिकी प्रतिष्ठानों की सुरक्षा भी बढ़ा दी गई है.
जॉर्डन में हुआ हमला मध्य पूर्व की स्थिति को और गंभीर बना सकता है. यदि दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई जारी रहती है, तो इसका असर पूरे क्षेत्र की सुरक्षा, वैश्विक व्यापार और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर भी पड़ सकता है. ऐसे में दुनिया की नजर अब अमेरिका और ईरान के अगले कदम पर टिकी हुई है.