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नई दिल्ली: ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने अमेरिका और इजरायल के साथ जारी संघर्ष को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने साफ कहा कि युद्ध की शुरुआत ईरान ने नहीं की थी. उनके मुताबिक, विरोधियों ने सैन्य दबाव के जरिए ईरान को कमजोर करने की कोशिश की, लेकिन उनकी योजना सफल नहीं हो सकी. पेजेशकियान ने दावा किया कि तमाम मुश्किलों के बावजूद ईरान आज भी मजबूती से खड़ा है.
पेजेशकियान ने शुक्रवार, 7 अगस्त को ईरानी सरकारी टीवी को दिए इंटरव्यू में संघर्ष से जुड़े कई मुद्दों पर अपनी बात रखी. उन्होंने मुस्लिम देशों से एकजुट होने की अपील भी की. उनका कहना था कि अगर मुस्लिम देश एक साथ खड़े हों तो बाहरी ताकतों की चुनौतियों और साजिशों का सामना ज्यादा मजबूती से किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि युद्ध से पहले ईरान बातचीत के जरिए समस्या का हल निकालने की कोशिश कर रहा था, लेकिन परिस्थितियां धीरे-धीरे सैन्य संघर्ष में बदल गईं.
राष्ट्रपति ने दावा किया कि विरोधियों को उम्मीद थी कि लगातार सैन्य दबाव और बिगड़ते हालात के कारण ईरान के भीतर अस्थिरता पैदा होगी. हालांकि, ऐसा नहीं हुआ. उन्होंने कहा कि मौजूदा संकट ने ईरान की ताकत को सामने ला दिया है और देश आगे भी मजबूती के साथ अपनी राह पर चलता रहेगा. पेजेशकियान ने एक बड़ा दावा करते हुए कहा कि उनके विरोधियों ने सीरिया जैसी स्थिति पैदा कर सिर्फ 48 घंटे में ईरान पर नियंत्रण करने की योजना बनाई थी.
हालांकि, ईरान ने अपनी सैन्य क्षमता और मजबूती का प्रदर्शन करते हुए इस रणनीति को विफल कर दिया. उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात ने यह साबित कर दिया है कि ईरान को आसानी से कमजोर या अस्थिर नहीं किया जा सकता. पेजेशकियान ने देश के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि उनसे बातचीत करना अब मुश्किल है, लेकिन उनकी मौजूदगी को उन्होंने ईरान की बड़ी ताकत बताया.
पेजेशकियान ने अमेरिका और इजरायल पर युद्ध शुरू करने का आरोप लगाया. उनका कहना है कि ईरान बातचीत के जरिए समाधान चाहता था, लेकिन दूसरी ओर से तनाव लगातार बढ़ाया गया. वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 6 अगस्त को उम्मीद जताई थी कि ईरान के साथ संघर्ष जल्द खत्म हो सकता है. उन्होंने अमेरिकी सेना के सामने हथियारों की आपूर्ति से जुड़ी कुछ परेशानियों का भी उल्लेख किया था.