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रूस से तेल खरीदने वाले भारत-चीन पर मंडराया 100% टैरिफ का खतरा, अमेरिकी सीनेट ने दी मंजूरी

रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर अमेरिकी दबाव बढ़ता दिख रहा है. अमेरिकी सीनेट ने नए प्रतिबंध विधेयक को मंजूरी दी है, जिसमें भारत और चीन समेत प्रमुख खरीदारों पर भारी टैरिफ लगाने का प्रावधान शामिल है.

Calendar Last Updated : 08 August 2026, 03:43 PM IST
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नई दिल्ली: अमेरिकी सीनेट ने रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर दबाव बढ़ाने के लिए बड़ा फैसला लिया है. सीनेट ने एक विधेयक को मंजूरी दी है, जिसके तहत रूस के प्रमुख ऊर्जा खरीदारों, जैसे भारत और चीन पर सख्त व्यापार शुल्क लगाए जा सकते हैं. अमेरिका ने इस फैसले को लेकर तर्क दिया है कि रूस से ऊर्जा खरीदने वाला कारोबार यूक्रेन में जारी युद्ध के लिए मॉस्को की आर्थिक मदद करता है. ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ नाम वाले इस विधेयक को 86-11 वोट से पारित किया गया.

विधेयक के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले शीर्ष पांच देशों से आने वाले सामान पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है. सीनेट से मंजूरी मिलने के बाद अब यह प्रस्ताव प्रतिनिधि सभा में जाएगा. अमेरिकी संसद का निचला सदन 31 अगस्त को दोबारा बैठक शुरू करेगा, जिसके बाद इस पर विचार किया जाएगा. फिलहाल रूस से तेल और गैस खरीदने वाले प्रमुख देशों में चीन, भारत, अजरबैजान, हंगरी और स्लोवाकिया शामिल हैं. प्रस्ताव में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत कई रूसी नेताओं, अधिकारियों, बड़े कारोबारी समूहों और वित्तीय संस्थानों पर प्रतिबंध लगाने का भी प्रावधान है.

ईरान पर भी कड़ा रुख

इस विधेयक में केवल रूस को लेकर ही कदम नहीं उठाया गया है. इसमें 1996 के ईरान प्रतिबंध कानून को भी वर्ष 2031 तक बढ़ाने का प्रस्ताव है. इस कानून के तहत ईरान के ऊर्जा क्षेत्र में निवेश करने वाली कंपनियों पर कार्रवाई की जा सकती है.

ग्राहम की विरासत से जुड़ा विधेयक

इस द्विदलीय विधेयक को रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम और डेमोक्रेट रिचर्ड ब्लूमेंथल का समर्थन मिला था. ग्राहम के निधन के बाद दोनों दलों के नेताओं ने इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाने की कोशिश तेज कर दी. ग्राहम की जगह नियुक्त उनकी बहन डार्लिन ग्राहम ने कहा कि विधेयक रूस की अर्थव्यवस्था को समर्थन देने वाले देशों के सामने स्पष्ट विकल्प रखता है- अमेरिका के साथ व्यापार या सस्ती रूसी ऊर्जा. वोटिंग के बाद ब्लूमेंथल ने कहा कि ग्राहम को इस फैसले पर गर्व होता. उनके मुताबिक प्रस्ताव का उद्देश्य रूस के खिलाफ कड़ा आर्थिक दबाव बनाना और यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में मदद करने वालों को रोकना है.

हालांकि, कुछ डेमोक्रेट सांसदों ने विधेयक को लेकर चिंता भी जताई है. उनका कहना है कि इससे राष्ट्रपति ट्रंप को टैरिफ लगाने की बहुत व्यापक शक्तियां मिल सकती हैं, जिनका इस्तेमाल वह अपनी व्यापार नीति के तहत कर सकते हैं. डेमोक्रेटिक सांसद ग्रेगरी मीक्स और डॉन बेयर ने कहा कि वे रूस को उसके युद्ध के लिए जवाबदेह ठहराने के प्रयासों का समर्थन करते हैं, लेकिन उन्हें आशंका है कि नई शक्तियों का इस्तेमाल व्यापक व्यापार युद्ध के लिए किया जा सकता है. अब विधेयक प्रतिनिधि सभा में मंजूरी के इंतजार में है.

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