Courtesy: instagram @ Donald Trump
नई दिल्ली: महीनों से जारी मिडिल ईस्ट के तनाव को शांत करने के उद्देश्य से स्विट्जरलैंड में आयोजित अमेरिका और ईरान के बीच पहले दौर की उच्च स्तरीय बैठक बिना किसी ठोस नतीजे के समाप्त हो गई. हाल ही में दोनों देशों के बीच हुए अंतरिम समझौते के बाद इस वार्ता को चार महीने पुराने संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा था. यह पहली ही बैठक बेहद तनावपूर्ण रही, जहां दोनों पक्षों के बीच लेबनान के मुद्दे पर गंभीर मतभेद खुलकर सामने आए.
इस महत्वपूर्ण शांति वार्ता में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस कर रहे थे. ईरान की तरफ से संसद अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कमान संभाली. मुख्य बैठक से ठीक पहले ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने कतर और पाकिस्तान के मध्यस्थों से अलग-अलग चर्चा की.
ईरान ने स्पष्ट किया कि अमेरिका के साथ बातचीत की आगे की प्रगति इस बात पर टिकी है कि वाशिंगटन अंतरिम समझौते की शर्तों को जमीन पर कितना लागू करता है. ईरान ने अमेरिका पर आरोप लगाया कि वह समझौते की पहली और सबसे अहम शर्त सभी मोर्चों पर सीजफायर को लागू कराने में पूरी तरह विफल रहा है. जिसका सीधा प्रमाण लेबनान में जारी इजरायली सैन्य कार्रवाई है.
तकरीबन 80 मिनट तक चली इस बैठक में मुख्य रूप से आर्थिक प्रतिबंधों में राहत देने और ईरान की फ्रीज संपत्तियों को रिलीज करने जैसे गंभीर विषयों पर चर्चा हो रही थी. लेकिन वार्ता के बीच में ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक सोशल मीडिया पोस्ट ने माहौल बिगाड़ दिया. ट्रंप ने पोस्ट के जरिए ईरान को चेतावनी दी कि वह लेबनान में अपने सहयोगी समूहों को नियंत्रित करे. ईरानी प्रतिनिधिमंडल ट्रंप के इस बयान से बेहद नाराज हुआ और विरोध स्वरूप कुछ देर के लिए बैठक से बाहर चला गया.
बाद में ईरानी संसद अध्यक्ष गालिबफ ने कहा कि अमेरिका को अपनी बयानबाजी में सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि ईरान की सेना किसी भी आक्रामक स्थिति का जवाब देने के लिए तैयार है. हालांकि, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस गतिरोध को सामान्य बताते हुए कहा कि कठिन कूटनीतिक वार्ताओं में ऐसे उतार-चढ़ाव आते रहते हैं. उन्होंने यह भी जोड़ा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने संबंधों को सुधारने के लिए एक नए दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ने के निर्देश दिए हैं.
बैठक में कड़वाहट इस कदर बढ़ गई कि ईरानी प्रतिनिधियों ने पारंपरिक प्रतीकात्मक हैंडशेक और संयुक्त तस्वीर खिंचवाने से साफ मना कर दिया. इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि दक्षिणी लेबनान में इजराइली सेना की मौजूदगी फिलहाल बरकरार रहेगी. नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल अपनी सुरक्षा के लिए बनाए गए बफर जोन को जरूरत पड़ने तक खाली नहीं करेगा. उन्होंने ट्रंप के साथ मतभेदों की बात स्वीकार करते हुए कहा कि इजरायल एक संप्रभु राष्ट्र है और दोनों नेताओं का हर बात पर सहमत होना जरूरी नहीं है.
अमेरिका-ईरान वार्ता में पैदा हुए इस कूटनीतिक गतिरोध का सीधा असर वैश्विक बाजार पर पड़ा है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है, जिससे ब्रेंट क्रूड $1 से अधिक महंगा होकर 81 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है.