Courtesy: Truth/@realDonaldTrump
नई दिल्ली: अमेरिका ने एक बार फिर ईरान के सामने शांति प्रस्ताव के बदले कुछ शर्तें रखी हैं. ईरान की अर्ध सरकारी मीडिया एजेंसी फार्स के अनुसार, अमेरिका ने ईरान के सामने पांच शर्तें रखी है. अमेरिका के इस कदम के बाद अब दोनों देशों के बीच शांति की उम्मीद एक बार फिर धुंधली होती दिखाई दे रही है. हालांकि, इन शर्तों को लेकर अभी तक वाशिंगटन या तेहरान की ओर से कोई भी आधिकारिक बयान जारी नहीं हुआ है.
क्या है अमेरिका की 5 शर्तें
ईरानी मीडिया एजेंसी के अनुसार, अमेरिका ने ईरान के सामने जो शर्तें रखी है, वो इस प्रकार हैं:
अमेरिका नहीं देगा युद्ध हर्जाना- अमेरिका ने साफ कर दिया है कि वो इरान को अमेरिकी हमलों के दौरान हुए नुकसान के लिए किसी भी प्रकार का युद्ध हर्जाना या मुआवजा नहीं देगा.
ईरान को सौंपना होगा यूरेनियम- अमेरिका ने पहले भी ये शर्त रखी थी कि ईरान को अपने पास मौजूद यूरेनियम भंडार को अमेरिका को सौंपना होगा. जानकारी के अनुसार ईरान के पास फिलहाल 400 किलोग्राम समृद्ध यूरेनियम है.
परमाणु केंद्रों पर भी पाबंदी- अमेरिका ने ईरान के परमाणु केंद्रों पर पाबंदी लगाने की शर्त सामने रखी है. इसके अनुसार ईरान को केवल एक परमाणु संयंत्र चालू रखने की अनुमति दी जाएगी.
ईरानी एसेट्स नहीं होंगे अनफ्रीज- विदेशों में फ्रीज (जब्त) किए गए ईरान फंड्स और संपत्तियों को अनफ्रीज करने की मांग को अमेरिका ने खारिज कर दिया है.
सीजफायर- अमेरिका ने साफ कहा है कि दोनों देशों के बीच युद्धविराम को इस शर्त पर आगे बढ़ाया जाएगा, जब औपचारिक वार्ता शुरू होगी.
वहीं, अमेरिका की शर्तों को लेकर ईरानी जानकारों का कहना है कि अमेरिका की ये शर्तें दोनों देशों के बीच चल रहे विवाद को सुलझाने के लिए नहीं, बल्कि बातचीत की आड़ में उन सैन्य उद्देश्यों को हासिल करना है जो वो युद्ध के जरिए नहीं कर सकते.
ईरान ने भी रखी थी शर्तें
बता दें कि इससे पहले शांति वार्ता के दौरान ईरान ने भी अमेरिका के सामने कुछ शर्तें रखी थी. इसमें युद्ध का हर्जाना, फ्रीज संपत्तियों की रिलीज, ईरान पर प्रतिबंध हटाने, स्टेट ऑफ होर्मुज पर ईरान की संप्रभुता और लेबनान सहित अन्य मोर्चों पर विवाद को खत्म करने की मांग की गई थी.
8 अप्रैल को हुआ था युद्धविराम
बता दें कि अमेरिका और इजरायल द्वारा 28 फरवरी को ईरान के कई शहरों पर किए गए हमलों के बाद 8 अप्रैल को अमेरिका-ईरान के बीच सीजफायर हुआ था. बता दें कि ये संघर्ष 40 दिन तक चला था. सीजफायर के बाद 11 और 12 अप्रैल को इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता का पहला दौर शुरू हुआ था. हालांकि दोनों देशों के बीच चल रही शांति वार्ता के प्रयास अभी तक बेनतीजा रहे हैं.