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नई दिल्ली: वेनेजुएला में आए भीषण भूकंप के कई दिन बाद भी तबाही का मंजर खत्म नहीं हुआ है. मलबे के नीचे दबे लोगों को बचाने के लिए राहत और बचाव दल लगातार दिन-रात काम कर रहे हैं. हर गुजरते घंटे के साथ उम्मीद कम होती जा रही है, लेकिन बीच-बीच में किसी के जीवित मिलने की खबर बचावकर्मियों और परिवारों के लिए नई उम्मीद लेकर आ रही है. वहीं मृतकों की संख्या लगातार बढ़ते हुए करीब 1,500 तक पहुंच गई है.
24 जून को आए 7.2 और 7.5 तीव्रता के दो शक्तिशाली भूकंपों ने वेनेजुएला के ला गुआइरा राज्य को सबसे ज्यादा प्रभावित किया. राजधानी कराकस से लगभग 40 किलोमीटर दूर स्थित इस इलाके में कई बहुमंजिला इमारतें पूरी तरह ढह गईं. हजारों लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं और हालात को देखते हुए कई देशों की बचाव टीमें भी राहत कार्य में जुटी हुई हैं.
कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने कहा कि सरकार ने बचाव अभियान रोकने का कोई फैसला नहीं लिया है. उन्होंने बताया कि रविवार को भी मलबे से कुछ लोगों को जीवित बाहर निकाला गया, इसलिए खोज अभियान पूरी ताकत से जारी रहेगा. उन्होंने यह भी घोषणा की कि क्षतिग्रस्त इमारतों की सुरक्षा जांच के लिए एक विशेष राष्ट्रपति आयोग बनाया जाएगा. यह आयोग तय करेगा कि कौन-सी इमारतें रहने लायक हैं और किन्हें पूरी तरह खाली कराना होगा.
सरकार ने जानकारी दी कि प्रभावित क्षेत्रों में स्कूलों को एक और सप्ताह तक बंद रखने का फैसला लिया गया है. वहीं ला गुआइरा में करीब 75 प्रतिशत बिजली आपूर्ति बहाल कर दी गई है. प्रशासन का कहना है कि बाकी क्षेत्रों में भी जल्द सेवाएं सामान्य करने की कोशिश की जा रही है. शुरुआत में सरकार ने राहत सामग्री पहुंचाने वाले स्वयंसेवकों की सराहना की थी, लेकिन बाद में भारी भीड़ और आपातकालीन वाहनों की आवाजाही सुचारु रखने के लिए कई सड़कों पर यातायात सीमित कर दिया गया.
नेशनल असेंबली के अध्यक्ष जॉर्ज रोड्रिगेज ने बताया कि रविवार को मृतकों की संख्या में और इजाफा हुआ है. अब तक करीब 1,450 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है. इसके अलावा 3,150 लोग घायल हुए हैं, 12,721 लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं और 774 इमारतें पूरी तरह ढह चुकी हैं. उन्होंने कहा कि इस समय सबसे बड़ी चुनौती लोगों की जान बचाना और बेघर हुए परिवारों के लिए अस्थायी शिविर तैयार करना है, ताकि उन्हें सुरक्षित ठिकाना मिल सके.
भूकंप के बाद पहले कुछ दिनों तक स्थानीय लोग और स्वयंसेवक सीमित संसाधनों के साथ मलबा हटाने में जुटे रहे. बाद में 2,600 से अधिक विदेशी बचावकर्मी भी राहत कार्य में शामिल हुए. लगातार आ रहे झटकों के कारण बचाव अभियान और अधिक चुनौतीपूर्ण बन गया है. सरकार के अनुसार शनिवार शाम तक 33 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका था, जिनमें कई बच्चे भी शामिल थे. हालांकि हजारों लोग अब भी लापता हैं और उनके वास्तविक आंकड़ों को लेकर सरकार और विपक्ष के दावों में अंतर बना हुआ है.
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी बड़े भूकंप के बाद शुरुआती 72 घंटे सबसे महत्वपूर्ण होते हैं. इसके बाद मलबे में दबे लोगों के जीवित मिलने की संभावना तेजी से घटने लगती है. स्विस बचाव दल के प्रमुख सेबेस्टियन यूगस्टर ने बताया कि उनकी टीम ने प्रशिक्षित खोजी कुत्तों की मदद से कई लोगों का पता लगाया, लेकिन कुछ पीड़ितों तक समय रहते पहुंचना संभव नहीं हो सका. अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण का अनुमान है कि इस आपदा में मृतकों की संख्या 10 हजार से भी अधिक हो सकती है, जिससे यह लैटिन अमेरिका के सबसे घातक भूकंपों में शामिल हो सकता है.
राहत अभियान के दौरान कई भावुक कर देने वाले बचाव अभियान भी सामने आए. अमेरिकी बचाव दल ने मलबे से एक छोटे बच्चे को सुरक्षित बाहर निकाला, जिसका वीडियो भी साझा किया गया. वहीं कोलंबिया की टीम ने 11 वर्षीय मोइसेस नाम के एक बच्चे को करीब तीन मीटर गहराई से जिंदा बाहर निकाला. उसकी बांह टूट गई थी, जबकि इस हादसे में उसकी मां और बहन की मौत हो गई. इसी तरह मैक्सिको के बचाव दल ने भी एक अन्य 11 वर्षीय बच्चे को मलबे से सुरक्षित निकालने में सफलता हासिल की.
पोप लियो ने रोम से वेनेजुएला के लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए राहत कार्य में लगे बचावकर्मियों का धन्यवाद किया. वहीं अमेरिका की ओर से पहले घोषित सहायता राशि के अलावा अतिरिक्त आर्थिक मदद देने की तैयारी की जा रही है. इस बीच विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो ने वेनेजुएला लौटने की इच्छा जताई है, हालांकि उनकी वापसी को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं. उधर पश्चिमी फाल्कन राज्य में बिजली संकट के कारण देश की सबसे बड़ी अमुआय तेल रिफाइनरी का संचालन भी रोकना पड़ा है.