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नई दिल्ली: सफेद बालों की समस्या आजकल कम उम्र में भी आम होती जा रही है, और इसे छिपाने या रोकने के लिए लोग तरह-तरह के उपाय अपनाते हैं. बाजार में मिलने वाले एंटी-ग्रे हेयर सीरम बड़े-बड़े दावे करते हैं जैसे बालों को दोबारा काला करना या सफेद बालों को पूरी तरह रोक देना. लेकिन क्या ये दावे सच में उतने असरदार हैं, जितने सुनने में लगते हैं? इस सवाल का जवाब जानना बेहद जरूरी है.
अब इस पर त्वचा विशेषज्ञ ने अपनी राय रखते हुए बताया कि इन सीरम्स को लेकर लोगों की उम्मीदें अक्सर जरूरत से ज्यादा होती हैं. उनका कहना है कि ये प्रोडक्स कुछ हद तक मदद कर सकते हैं, लेकिन इन्हें किसी चमत्कारी इलाज के रूप में देखना सही नहीं है.
त्वचा विशेषज्ञों का कहना है कि एक बार बाल पूरी तरह सफेद हो जाएं, तो उन्हें दोबारा प्राकृतिक रंग में लाना संभव नहीं होता. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि बालों का रंग बनाने वाली कोशिकाएं मेलानोसाइट्स धीरे-धीरे काम करना बंद कर देती हैं. जब ये कोशिकाएं खत्म हो जाती हैं, तो बाल सफेद हो जाते हैं.
हालांकि, कुछ मामलों में ये सीरम बालों के सफेद होने की गति को धीमा कर सकते हैं. खासतौर पर तब, जब इसका कारण तनाव, पोषण की कमी या ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस हो. ऐसे में सही तत्वों वाले उत्पाद थोड़ी मदद कर सकते हैं.
विशेषज्ञों के अनुसार, विटामिन C, विटामिन E, कैटालेज, कॉपर पेप्टाइड्स और नियासिनमाइड जैसे तत्व वैज्ञानिक रूप से उपयोगी माने जाते हैं. ये बालों की जड़ों के आसपास होने वाले नुकसान को कम करने में मदद कर सकते हैं. वहीं, कई हर्बल या 'स्पेशल फॉर्मूला' वाले उत्पाद सिर्फ मार्केटिंग का हिस्सा होते हैं, जिनके प्रभाव के पुख्ता प्रमाण नहीं होते.
जिन लोगों के बाल कम उम्र में लाइफ स्टाइल या पोषण की वजह से सफेद हो रहे हैं, उन्हें इससे कुछ लाभ मिल सकता है. लेकिन अगर बाल सफेद होना उम्र या जेनेटिक्स के कारण है, तो ऐसे मामलों में इन उत्पादों का असर सीमित ही रहता है.
ज्यादातर सीरम सही तरीके से इस्तेमाल करने पर सुरक्षित माने जाते हैं, लेकिन कुछ लोगों को स्कैल्प पर जलन या एलर्जी हो सकती है, इसलिए सावधानी जरूरी है.