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नई दिल्ली: केरल आज ओणम के रंग में रंगा हुआ है. फूलों से सजे घर, पारंपरिक पकवान, सांस्कृतिक कार्यक्रम और नावों की रोमांचक दौड़ इस त्योहार की खूबसूरती बढ़ाते हैं. ओणम सिर्फ फसल का त्योहार नहीं, बल्कि समृद्धि, खुशहाली और आपसी एकता का प्रतीक भी है. 10 दिनों तक चलने वाला यह उत्सव मलयालम सौर कैलेंडर के चिंगम महीने में मनाया जाता है, जो आमतौर पर अगस्त-सितंबर के बीच आता है. द्रिक पंचांग के अनुसार, 2026 में तिरुवोनम 26 अगस्त, बुधवार को मनाया जा रहा है.
ओणम का संबंध केरल के प्रसिद्ध राजा महाबली से जोड़ा जाता है. मान्यता है कि उनके शासनकाल में राज्य में सुख, शांति और समृद्धि थी. प्रजा अपने राजा से बेहद प्रेम करती थी. महाबली की बढ़ती शक्ति से चिंतित देवताओं ने भगवान विष्णु से मदद मांगी. इसके बाद विष्णु ने वामन अवतार लिया और राजा महाबली के पास पहुंचे. उन्होंने राजा से केवल तीन कदम जमीन मांगी.
महाबली ने उनकी मांग स्वीकार कर ली. इसके बाद वामन ने विशाल रूप धारण कर लिया. दो कदमों में उन्होंने पृथ्वी और आकाश को नाप लिया. तीसरे कदम के लिए जब कोई स्थान नहीं बचा तो महाबली ने अपना सिर आगे कर दिया. उनकी भक्ति और त्याग से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें वरदान दिया कि वह हर साल एक बार अपनी प्रजा से मिलने धरती पर आ सकेंगे. माना जाता है कि ओणम राजा महाबली के इसी वार्षिक आगमन का उत्सव है.
ओणम का उत्सव अथम से शुरू होकर तिरुवोनम के साथ पूरा होता है. इन दस दिनों में घरों और आसपास के इलाकों में उत्सव का माहौल रहता है.
पहला दिन- अथम: मंदिरों में पूजा के साथ शुरुआत होती है. घरों के बाहर पूकलम यानी फूलों की रंगोली बनाई जाती है और हर दिन इसमें नए फूल जोड़े जाते हैं.
दूसरा दिन- चिथिरा: पूकलम को और बड़ा व सुंदर बनाया जाता है. लोग पूजा और त्योहार की तैयारियों में जुटते हैं.
तीसरा दिन- चोधी: परिवार के लोग नए कपड़े और त्योहार से जुड़े सामान खरीदते हैं.
चौथा दिन- विशाकम: घरों में ओणम की तैयारियां तेज हो जाती हैं और बाजारों में खरीदारी बढ़ती है.
पांचवां दिन- अनिझम: केरल के बैकवाटर में प्रसिद्ध वल्लमकली यानी सांप नाव दौड़ आयोजित होती है.
छठा दिन- त्रिकेता: सामुदायिक स्तर पर सांस्कृतिक कार्यक्रम, संगीत और पारंपरिक प्रस्तुतियां होती हैं.
सातवां दिन- मूलम: घरों और सार्वजनिक स्थानों पर आकर्षक पूकलम बनाए जाते हैं.
आठवां दिन- पूरदाम: मिट्टी की पिरामिड जैसी प्रतिमाएं बनाई जाती हैं, जिन्हें महाबली और वामन से जुड़ी परंपरा के अनुसार पूकलम में रखा जाता है.
नौवां दिन- उथरादम: इसे पहला ओणम माना जाता है. लोग घरों की सफाई और अंतिम तैयारियां पूरी करते हैं.
दसवां दिन- तिरुवोनम: यह ओणम का सबसे खास दिन होता है. परिवार पूजा करते हैं और पूकलम सजाते हैं. इस दिन पारंपरिक ओणम साध्या भी तैयार की जाती है, जिसमें केले के पत्ते पर कई तरह के शाकाहारी व्यंजन परोसे जाते हैं.