नई दिल्ली: दिल्ली में एक बार फिर से मौसम ने करवट ली है. मौसम ने अचानक करवट लेने के संकेत दे दिए हैं और आने वाले दिनों में देश के कई हिस्सों में तेज बदलाव देखने को मिल सकता है. एक मजबूत पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से बारिश, आंधी और बर्फबारी जैसी गतिविधियां तेज होने की संभावना है, जिससे आम जनजीवन के साथ-साथ किसानों की चिंताएं भी बढ़ सकती हैं.
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग और स्वतंत्र मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, 29 और 30 मार्च को इसका असर अपने चरम पर रहेगा. इस दौरान उत्तर भारत, मध्य भारत और कुछ दक्षिणी क्षेत्रों में बादल गड़गड़ाहट के साथ बारिश, ओलावृष्टि और तेज हवाओं की संभावना जताई गई है.
विशेषज्ञों के मुताबिक, इस बार मौसम में बदलाव तीन दिशाओं से आ रही नमी के कारण हो रहा है. अरब सागर, बंगाल की खाड़ी और पश्चिमी विक्षोभ से जुड़ी हवाएं मिलकर वातावरण में नमी बढ़ा रही हैं. इसका असर एक नहीं बल्कि कई राज्यों महाराष्ट्र, गुजरात, छत्तीसगढ़, ओडिशा और उत्तर प्रदेश तक देखा जा सकता है.
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि उत्तर भारत इस सिस्टम से सबसे ज्यादा प्रभावित होगा. पंजाब, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में बारिश और पहाड़ों पर बर्फबारी की संभावना है. मैदानी इलाकों में बादल की गरज और तेज हवाओं के साथ बारिश हो सकती है, जिससे तापमान में गिरावट आएगी. इसका असर दिल्ली में अभी से ही देखने को मिल रहा है. रविवार की सुबह दिल्ली में बादल छाए रहे .
मध्य प्रदेश, विदर्भ और छत्तीसगढ़ में छिटपुट ओलावृष्टि की संभावना जताई गई है. इससे फसलों को नुकसान पहुंच सकता है. वहीं गुजरात और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में भी मौसम अस्थिर रह सकता है.
विशेषज्ञों ने खासतौर पर किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी है. आने वाले दिनों में तेज आंधी और बारिश से गेहूं जैसी फसलों को नुकसान हो सकता है. इसलिए फसल की कटाई और भंडारण जल्द करने की सलाह दी गई है.
हालांकि मार्च के अंत में होने वाली बारिश से थोड़ी राहत मिल सकती है, लेकिन 3 अप्रैल के आसपास फिर से एक सक्रिय सिस्टम के कारण भारी बारिश की संभावना जताई गई है. अगले दो हफ्तों में असामान्य मौसम और तेज तूफानों का दौर जारी रह सकता है.