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सैटेलाइट ने पाकिस्तान की खोली पोल, पाक एयरबेस पर दिखें ईरानी जासूसी विमान

युद्ध के बीच सैटेलाइट तस्वीरों में खुलासा हुआ है कि खाड़ी युद्ध के दौरान पाकिस्तान ने अमेरिका को धोखा देते हुए ईरान के सैन्य विमानों, खासकर RC-130 टोही विमान को नूर खान एयरबेस पर उतरने और छुपाने की अनुमति दी थी.

Calendar Last Updated : 13 May 2026, 09:32 AM IST
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नई दिल्ली: खाड़ी युद्ध के दौरान पाकिस्तान की एक बड़ी करतूत सामने आई है. अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान ने ईरान के सैन्य विमानों को अपने नूर खान एयरबेस पर उतरने की अनुमति दी थी. वैंटोर कंपनी की हाई-रेजोल्यूशन उपग्रह तस्वीरों में पाकिस्तान के नूर खान एयरबेस पर ईरानी वायुसेना का C-130 सैन्य विमान साफ दिख रहा है. यह खुलासा पाकिस्तान के लिए शर्मिंदगी का सबब बन गया है.

पाकिस्तान खुद को मध्यस्थ बताता रहा

यह घटना उस समय हुई जब पाकिस्तान खुद को अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता में तटस्थ मध्यस्थ के रूप में पेश कर रहा था. रिपोर्ट में दो अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि युद्धविराम के बाद ईरान ने अपने कई विमान, जिनमें RC-130 टोही विमान भी शामिल था, पाकिस्तान के एयरबेस पर भेजे थे. पाकिस्तान ने इन्हें अमेरिकी हमलों से बचाने के लिए मदद की.

पाकिस्तान की आधी-अधूरी सफाई

इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया. हालांकि, मंत्रालय ने यह मान लिया कि ईरानी विमानों ने राजनयिकों और सुरक्षा कर्मियों की आवाजाही के लिए पाकिस्तानी एयरबेस का इस्तेमाल किया था. 

मंत्रालय का कहना है कि ये विमान युद्धविराम के दौरान आए थे और उनका कोई सैन्य उद्देश्य नहीं था, लेकिन यह नहीं बताया गया कि टोही विमान जैसे संवेदनशील विमान को इतने लंबे समय तक उच्च सुरक्षा वाले एयरबेस पर क्यों रखा गया.

अमेरिका में पाकिस्तान पर बढ़ा अविश्वास

इस खुलासे के बाद अमेरिका में पाकिस्तान के प्रति गहरा संदेह पैदा हो गया है. रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने पाकिस्तान की मध्यस्थ भूमिका पर सवाल उठाते हुए इसकी समीक्षा की मांग की है. अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि पाकिस्तान ईरान की बातों को वाशिंगटन के सामने ज्यादा सकारात्मक ढंग से पेश कर रहा है. इससे ट्रंप प्रशासन में भी चिंता बढ़ गई है कि पाकिस्तान दोनों देशों के बीच हो रही वार्ता की सही जानकारी नहीं दे रहा है.

यह पूरा मामला पाकिस्तान की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है. अमेरिका और ईरान के बीच शांति की कोशिशों में पाकिस्तान की भूमिका अब संदिग्ध हो गई है. 

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