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पटना: बिहार की राजधानी पटना में बुधवार को राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के नेतृत्व में लोकभवन मार्च निकाला गया. बता दें, यह प्रदर्शन सीवान में छात्र आंदोलन के दौरान हुई पुलिस फायरिंग और अन्य मुद्दों को लेकर किया गया. वहीं मार्च के दौरान कई राजद कार्यकर्ता हाथों में तिरंगा लेकर पहुंचे, जबकि कुछ प्रदर्शनकारियों ने विरोध दर्ज कराने के लिए डमी एके-47 भी साथ रखी.
जानकारी के अनुसार, मार्च की शुरुआत पटना के जेपी गोलंबर से हुई. तेजस्वी यादव के साथ बड़ी संख्या में राजद कार्यकर्ता आगे बढ़े और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की. वहीं पार्टी ने निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर कथित पुलिस फायरिंग, पेपर लीक और युवाओं से जुड़े अन्य मुद्दों को लेकर सरकार को घेरा गया.
जेपी गोलंबर से आगे बढ़ते हुए प्रदर्शनकारी डाकबंगला चौराहे पहुंचे, जहां पुलिस ने सुरक्षा के लिए बैरिकेडिंग की थी. हालांकि प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड पार कर आगे बढ़ने की कोशिश की. इसके बाद पुलिस ने उन्हें आयकर गोलंबर के पास रोक दिया. इलाके में बड़ी संख्या में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी तैनात किए गए थे.
बिहार के पटना में तेजस्वी का राजभवन मार्च लकड़ी की AK-47 लेकर पहुंचे कार्यकर्ता साथ ही हजारों के हाथ में तिरंगा झंडा लिए हुए है pic.twitter.com/zoTwgTRcw4
— Anjali Kumari (@AnjaliKumari009) August 19, 2026
प्रदर्शनकारियों ने यहां भी आगे बढ़ने का प्रयास किया, जिसके बाद पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया. लेकिन पानी की तेज बौछारों के बावजूद कई कार्यकर्ता मौके पर डटे रहे और कुछ प्रदर्शनकारी पानी में डांस करते हुए भी नजर आए.
इतना ही नहीं प्रदर्शन के दौरान कुछ राजद कार्यकर्ता पुलिस लिखी टी-शर्ट पहनकर डमी एके-47 लेकर पहुंचे। उनके साथ कुछ अन्य प्रदर्शनकारियों ने छात्र लिखे कपड़े पहन रखे थे. पार्टी कार्यकर्ताओं ने इन प्रतीकात्मक हथियारों के जरिए सीवान में 25 जुलाई को हुई पुलिस फायरिंग की घटना पर अपना विरोध दर्ज कराया.
मार्च के दौरान पुलिस ने तेजस्वी यादव समेत कई राजद कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया. उन्हें आयकर कार्यालय के पास से हिरासत में लेकर सचिवालय थाना ले जाया गया. बताया गया कि बाद में उन्हें रिहा किया जा सकता है. इस बीच, राजद का एक प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल सैयद अता हसनैन से मुलाकात कर पार्टी की मांगों से जुड़ा ज्ञापन सौंप सकता है. पुलिस-प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को लोकभवन तक जाने की अनुमति नहीं दी.