menu-icon
The Bharatvarsh News

'पेपर में 100 मार्कस के सवाल के लिए 500 सवाल का क्वेशन बैंक बनाया जाता हैं', NEET-UG पेपर लीक मामले में सरकार का जवाब

NEET-UG 2026 मामले में सुप्रीम कोर्ट में NTA की परीक्षा व्यवस्था पर सवाल उठे और अधिक सुरक्षित, स्वतंत्र सिस्टम की मांग की गई.SG तुषार मेहता ने बताया कि प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर प्रिंटिंग और ट्रांसपोर्ट तक कई स्तरों पर सुरक्षा व्यवस्था लागू है.

Calendar Last Updated : 19 August 2026, 05:18 PM IST
Share:

नई दिल्ली: NEET-UG 2026 परीक्षा से जुड़ी कथित पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की व्यवस्था पर सवाल उठाए गए है. बता दें, जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ के सामने याचिकाकर्ताओं की ओर से मांग की गई कि केंद्र सरकार NTA की मौजूदा व्यवस्था की जगह अधिक सुरक्षित और स्वतंत्र संस्थागत प्रणाली तैयार करने पर विचार करे. 

याचिकाकर्ता ने दलील दी कि परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था तकनीकी रूप से मजबूत होनी चाहिए और उसमें सुरक्षा के साथ-साथ स्वतंत्र रूप से काम करने की क्षमता भी होनी चाहिए. 

SG तुषार मेहता ने बताया परीक्षा सिस्टम

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को परीक्षा की मौजूदा प्रक्रिया की जानकारी दी है. उन्होंने बताया कि प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने के दौरान कई स्तरों पर सुरक्षा व्यवस्था रहती है. हालांकि, प्रक्रिया में कुछ जगह मानवीय हस्तक्षेप भी होता है. उन्होंने बताया कि प्रश्नों का एक बड़ा बैंक तैयार किया जाता है, जिसके बाद अलग-अलग मॉडरेटर प्रश्नपत्रों के सेट तैयार करते हैं. इनमें से अंतिम पेपर सेट का चयन बाद के चरण में किया जाता है. चयन के बाद प्रश्नपत्रों को सीलबंद बॉक्स में सुरक्षित तरीके से प्रिंटिंग प्रेस तक पहुंचाया जाता है. प्रिंटिंग प्रेस में CCTV और CISF की निगरानी रहती है. प्रश्नपत्रों की पूरी प्रक्रिया को रिकॉर्ड किया जाता है और बाहरी लोगों की एंट्री पर रोक रहती है. 

GPS ट्रैकिंग से बैंक के स्ट्रॉन्ग रूम तक

मेहता ने बताया कि परीक्षा केंद्रों के लिए प्रश्नपत्र विशेष पैकिंग में भेजे जाते हैं. इन्हें ऐसे बॉक्स में रखा जाता है जिन्हें सामान्य तरीके से खोला नहीं जा सकता. प्रश्नपत्र ले जाने वाले वाहनों की GPS के जरिए निगरानी होती है और बॉक्स को बैंक के स्ट्रॉन्ग रूम में रखा जाता है. 

कोर्ट ने संस्थागत व्यवस्था पर दिया जोर

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि परीक्षा व्यवस्था को सिर्फ मौजूदा प्रक्रियाओं तक सीमित रखने के बजाय संस्थागत रूप देना जरूरी है. अदालत ने सुरक्षित कार्यालय, साइबर सुरक्षा, टेस्टिंग सेंटर, डेटा स्टोरेज और स्वतंत्र तकनीकी ढांचे की जरूरत पर सवाल किए. कोर्ट ने यह भी जानना चाहा कि राधाकृष्णन कमेटी की सिफारिशों को लागू करने के लिए कितनी स्थायी व्यवस्था तैयार की गई है. अदालत ने संस्थागत विशेषज्ञता, रिसर्च एंड डेवलपमेंट और भविष्य में बदलती तकनीक के अनुरूप परीक्षा प्रणाली विकसित करने की जरूरत पर जोर दिया.

सम्बंधित खबर

Recent News