अहमदाबाद: भारत के प्रधानमंत्री मौजूदा समय में गुजरात के दौरे पर हैं. इस दौराने उन्होंने गुजरात के अलग-अलग शहरों की यात्रा की है. अब पीएम गुजरात की राजधानी अहमदाबाद में हैं, जहां पर सोमवार को जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज का आगमन हुआ. उन्होंने साबरमती आश्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की और महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी. इसके बाद दोनों नेता एक ही कार में निकले.
इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सुबह साबरमती रिवरफ्रंट पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव का उद्घाटन किया. इसके साथ ही दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय वार्ता भी होगी.
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जर्मनी का चांसलर बनने के बाद मर्ज की यह पहली एशिया यात्रा है. इस दौरे का मुख्य उद्देश्य व्यापार, निवेश, रक्षा और तकनीकी सहयोग को बढ़ाना है. यात्रा के दौरान भारत-जर्मनी रणनीतिक साझेदारी के 25 साल पूरे होने का जश्न भी मनाया जा रहा है.
वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव के बीच, दोनों नेता यूक्रेन में शांति बहाली और अन्य अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी चर्चा हुई.
#WATCH | Ahmedabad, Gujarat: Prime Minister Narendra Modi and German Chancellor Friedrich Merz attend International Kite Festival 2026 at Sabarmati Riverfront.
— ANI (@ANI) January 12, 2026
(Source: DD News) pic.twitter.com/n611NrLIOl
चांसलर मर्ज का स्वागत करने के लिए अहमदाबाद पूरी तरह तैयार थी. उन्होंने पीएम मोदी के साथ साबरमती आश्रम का दौरा किया और काइट फेस्टिवल में भी हिस्सा लिया. इसके अलावा वे कौशल विकास से जुड़े कार्यक्रम में भी शामिल हुए. अहमदाबाद के बाद मर्ज बेंगलुरु के लिए रवाना होंगे.
Welcome to India! Willkommen in Indien!
— Randhir Jaiswal (@MEAIndia) January 12, 2026
Federal Chancellor Friedrich Merz @Bundeskanzler has arrived in Ahmedabad on an official visit. Warmly received by Hon’ble Governor of Gujarat, Shri Acharya Devvrat at the airport.
India and Germany are celebrating 75 years of… pic.twitter.com/Qw4ZkQ0FpP
इस यात्रा का एक प्रमुख आकर्षण 5 बिलियन यूरो का पनडुब्बी सौदा हो सकता है. जर्मनी की कंपनी थिसेनक्रुप और मझगांव डॉक के बीच छह स्टील्थ पनडुब्बियों की आपूर्ति पर बातचीत चल रही है. इसे भारत की 'मेक इन इंडिया' परियोजनाओं में सबसे बड़ा सौदा माना जा रहा है.
अमेरिका द्वारा भारतीय सामानों पर लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ के बीच, भारत अब यूरोप और विशेषकर जर्मनी के साथ अपने आर्थिक संबंधों को और मजबूत करना चाहता है.