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Bilkis Bano Case: दोषियों की रिहाई का आदेश रद्द, मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया फैसला

Bilkis Bano Case: बिलकिस बानों मामले दोषियों की रिहाई को लेकर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सजा इसलिए दी जाती है कि भविष्य में अपराध रुके. अपराधी को सुधरने का मौका दिया जाता है लेकिन पीड़ित की तकलीफ का भी एहसास होना चाहिए.

Calendar Last Updated : 08 January 2024, 12:10 PM IST
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Bilkis Bano Case: बिलकिस बानो मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने की सुनवाई. मामले में दोषियों की रिहाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी. बिलकिस बानो मामले पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आ चुका है. जस्टिस नागरत्ना ने टिप्पणी करते हुए कहा कि सजा इसलिए दी जाती है कि भविष्य में अपराध रुके. अपराधी को सुधरने का मौका दिया जाता है लेकिन पीड़ित की तकलीफ का भी एहसास होना चाहिए. दोषियों की रिहाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. इस दौरान मामले की सुनवाई हुई और इसका फैसला सुरक्षित रख लिया गया. 

सुप्रीम कोर्ट में आज मामले की सुनवाई के दौरान फैसला सुनाते हुए जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि कानूनी लिहाज से हमने इस मामले को अच्छे से समझा है. पीड़िता की याचिका को हमने सुनवाई योग्य माना है. इसी मामले में जो जनहित याचिकाएं दाखिल हुई हैं, हम उनके सुनवाई योग्य होने या न होने पर टिप्पणी नहीं कर रहे. 

मामले पर सुनवाई करते हुए जस्टिस नागरत्ना ने कहा, "जिस कोर्ट में मुकदमा चला था, रिहाई पर फैसले से पहले गुजरात सरकार को उसकी राय लेनी चाहिए थी. जिस राज्य में आरोपियों को सजा मिली, उसे ही रिहाई पर फैसला लेना चाहिए था. सजा महाराष्ट्र में मिली थी. इस आधार पर रिहाई का आदेश निरस्त हो जाता है." 13 मई 2022 के जिस आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार को रिहाई पर विचार के लिए कहा था, वह तथ्यों को छुपाकर हासिल किया गया था. 

गुजरात सरकार ने दी थी दोषियों को रिहाई 

गुजरात सरकार ने बिलकिस बानो मामले में उम्रकैद की सजा पाए सभी 11 दोषियों को रिहा कर दिया था. दोषियों की रिहाई को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी. अब सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद बिलकिस के दोषियों को जेल जाना होगा. 

SC ने मामले में फैसला रखा था सुरक्षित

सुप्रीम कोर्ट ने 11 दिनों तक सुनवाई की थी. 12 अक्टूबर को फैसला रखा था सुरक्षित सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुयन की बेंच ने बीते साल 12 अक्टूबर को फैसला सुरक्षित रख लिया था. सुनवाई के दौरान केंद्र और गुजरात सरकार ने दोषियों की सजा माफ करने से जुड़े ओरिजिनल रिकॉर्ड पेश किए थे. गुजरात सरकार ने दोषियों की सजा माफ करने के फैसले को सही ठहराया था. हालांकि, कोर्ट ने कहा था कि वो सजा माफी के खिलाफ नहीं है, बल्कि ये स्पष्ट किया जाना चाहिए कि दोषी कैसे माफी के योग्य बने.

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