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नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम के बाद शांति की उम्मीदें ज्यादा देर टिक नहीं सकीं. दोनों देशों के बीच एक बार फिर तनाव बढ़ गया है. अमेरिका ने ईरान के भीतर सैन्य कार्रवाई की है, जबकि ईरान ने भी जवाबी कदम उठाने का दावा किया है. सैन्य अभियान के दौरान अमेरिकी विमानों ने ईरान के मिसाइल और ड्रोन भंडारण केंद्रों के साथ-साथ तटीय रडार ठिकानों को निशाना बनाया. अमेरिका ने इस कार्रवाई को समुद्री व्यापार की सुरक्षा और युद्धविराम समझौते के पालन के लिए जरूरी बताया.
अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान चलाने की पुष्टि की है. अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, यह कार्रवाई एक वाणिज्यिक मालवाहक जहाज पर कथित ड्रोन हमले के जवाब में की गई. अमेरिका का दावा है कि सिंगापुर के झंडे वाले मालवाहक जहाज एम/वी एवर लवली पर 25 जून को हमला किया गया था, जब वह ओमान के तट के पास होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहा था.
हमले से पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पत्रकारों से बातचीत में संकेत दिया था कि अमेरिका जवाबी कार्रवाई कर सकता है. जब उनसे पूछा गया कि क्या अमेरिका सैन्य कदम उठाएगा, तो उन्होंने सिर्फ इतना कहा, "आपको जल्द पता चल जाएगा." कुछ ही समय बाद CENTCOM ने ऑपरेशन की आधिकारिक घोषणा कर दी. ट्रंप ने आरोप लगाया कि ईरान ने युद्धविराम समझौते का उल्लंघन करते हुए वाणिज्यिक जहाजों पर हमला किया है और इसे "गंभीर गलती" बताया.
अमेरिकी कार्रवाई के बाद इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया कि उसने क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है. हालांकि किन ठिकानों पर हमला हुआ और कितना नुकसान हुआ, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है. ईरानी मीडिया ने यह भी बताया कि अमेरिकी ऑपरेशन के बाद दक्षिणी शहर सिरिक के पास एक मिसाइल गिरी. वहीं, कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया कि होर्मुज जलडमरूमध्य में कथित नियम तोड़ने वाले जहाजों को चेतावनी देने के लिए गोलियां भी चलाई गईं.
मौजूदा विवाद का सबसे अहम केंद्र होर्मुज जलडमरूमध्य है. यह दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है और वैश्विक तेल तथा द्रवीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है. ऐसे में यहां बढ़ता तनाव पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार को प्रभावित कर सकता है. अमेरिका का कहना है कि वह इस मार्ग से गुजरने वाले सभी वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अपने सहयोगियों के साथ लगातार काम करता रहेगा.
ईरान ने खाड़ी देशों को अमेरिका के साथ मिलकर कोई सैन्य या रणनीतिक कदम न उठाने की चेतावनी दी है. तेहरान का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा में उसकी भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. ईरान ने अमेरिका और छह खाड़ी देशों के उस संयुक्त बयान का भी विरोध किया, जिसमें जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क लगाने के ईरानी दावे को खारिज किया गया था. ईरान के उप विदेश मंत्री काज़ेम ग़रीबाबादी ने कहा कि यदि ईरान की भूमिका को नजरअंदाज किया गया तो इस समुद्री मार्ग से सुरक्षित आवाजाही की गारंटी देना मुश्किल होगा.
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी ईरान को कड़ा संदेश दिया. उन्होंने कहा कि अमेरिका ने युद्धविराम का सम्मान किया है, लेकिन यदि ईरान हिंसक कार्रवाई जारी रखता है तो उसका जवाब भी उसी तरह दिया जाएगा. उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी विवाद का समाधान बातचीत से होना चाहिए, न कि हमलों के जरिए.
एक ओर जहां अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर क्षेत्र में एक सकारात्मक घटनाक्रम भी सामने आया. अमेरिका की मध्यस्थता में इज़राइल और लेबनान के बीच एक ढांचागत समझौता हुआ है. इसका उद्देश्य इज़राइल और ईरान समर्थित हिज़्बुल्लाह के बीच लंबे समय से जारी संघर्ष को कम करना है. समझौते में हिज़्बुल्लाह के भविष्य में निरस्त्रीकरण और दक्षिणी लेबनान से इज़राइली सेना की चरणबद्ध वापसी का प्रस्ताव शामिल है. हालांकि हिज़्बुल्लाह ने इस समझौते को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है.