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मानसून को लेकर बढ़ी चिंता, सुपर अल नीनो से फसलों पर पड़ सकता है असर

2026 में मजबूत अल नीनो की आशंका ने मौसम विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है, जिसका असर अगले साल तक दिख सकता है. भारत में इसका असर मॉनसून पर पड़ने की संभावना है, जहां IMD ने सामान्य से कम बारिश का अनुमान जताया है.

Calendar Last Updated : 22 August 2026, 01:50 PM IST
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नई दिल्ली: मानसून के बीच अल नीनो को लेकर दुनिया भर में चिंता बढ़ गई है. मौसम विशेषज्ञों का अनुमान है कि 2026 में विकसित हो रहा अल नीनो बेहद मजबूत हो सकता है और इसका असर अगले साल तक दिखाई दे सकता है. ब्रिटेन के मौसम विभाग ने इसे रिकॉर्ड स्तर का संभावित अल नीनो बताया है. हालांकि इसकी अंतिम तीव्रता को लेकर अभी अनिश्चितता बनी हुई है. 

भारत के लिए क्यों चिंता का विषय 

भारत के लिए इसकी चिंता इसलिए ज्यादा है क्योंकि अल नीनो का असर मॉनसून पर पड़ सकता है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने पहले ही 2026 के जून-सितंबर मॉनसून के लिए सामान्य से कम बारिश का अनुमान जताया है. मई में जारी दूसरे चरण के पूर्वानुमान में पूरे देश में बारिश दीर्घकालिक औसत की करीब 90 फीसदी रहने की संभावना बताई गई थी. 

बारिश और तापमान पर पड़ सकता है असर

अल नीनो के दौरान भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर का पानी सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाता है. इससे वायुमंडलीय परिसंचरण में बदलाव आता है और दुनिया के कई हिस्सों में बारिश और तापमान का पैटर्न प्रभावित हो सकता है. मौसम विभाग के मुताबिक 2026 में प्रशांत क्षेत्र में अल नीनो की स्थिति विकसित हो चुकी है और इसके मजबूत होने की संभावना जताई गई है. 

इसका असर कृषि क्षेत्र पर भी पड़ सकता है. बता दें, मानसून भारत की खेती के लिए बेहद अहम है और बारिश में कमी से खरीफ फसलों की बुवाई, उत्पादन और जलाशयों में पानी की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है. इसके साथ ही अगस्त-सितंबर के लिए भी IMD ने सामान्य से कम बारिश का अनुमान जारी किया है.  

2027 में टूट सकता है गर्मी का रिकॉर्ड

ब्रिटेन के मौसम विभाग के मुताबिक अल नीनो की वजह से वैश्विक तापमान में अस्थायी बढ़ोतरी हो सकती है और 2027 के रिकॉर्ड गर्म साल बनने की संभावना बढ़ सकती है. विशेषज्ञों का कहना है कि प्रशांत महासागर का बढ़ता तापमान दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में गर्मी, सूखा, भारी बारिश और बाढ़ जैसी चरम मौसमी घटनाओं को प्रभावित कर सकता है. 

भारत में भी मौसम का यह बदलता मिजाज चिंता बढ़ा रहा है. कई इलाकों में लंबे समय तक बारिश नहीं होने के बाद अचानक तेज बारिश और बाढ़ की स्थिति देखने को मिल रही है. ऐसे में अल नीनो के मजबूत होने की आशंका मानसून, खेती और खाद्य उत्पादन के लिए एक नई चुनौती बन सकती है.

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