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Halal Products Ban: यूपी में बैन हुए हलाल प्रोडक्ट्स, जानें कैसे मिलता है हलाल सर्टिफिकेट

Halal Products Ban:योगी आदित्यनाथ सरकार ने उत्तर प्रदेश में हलाल सर्टिफिकेट वाले प्रोडक्ट्स पर प्रतिबन्ध लगा दिया है. इसके बाद से इस पर काफी चर्चा हो रही है. आइये जानते हैं क्या होता है हलाल सर्टिफिकेट

Calendar Last Updated : 20 November 2023, 05:28 PM IST
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Halal Products Ban:  उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बड़ा फैसला लिया है. योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश में किसी भी तरह के "हलाल" सर्टिफिकेट वाले प्रोडक्ट्स को पुरी तरह से बंद करने का आदेश दिया है. सरकार के इस फैसले के बाद अब चर्चाओं का बाजार गर्म है. कुछ लोगों का कहना है कि खाने-पीने की चीज़ों में अचानक प्रतिबन्ध लगाना ठीक नहीं है. तो वहीं बहुत से लोग सरकार के इस फैसले की सराहना भी कर रहे हैं. खैर! ये सही है या गलत इसका जवाब तो आने वाले समय में अदालत या सरकार ही बताएगी। लेकिन आइये जानते हैं कि आखिर ये "हलाल" होता क्या है और योगी सरकार ने इस पर प्रतिबन्ध क्यों लगाया है... 


क्या होता है हलाल सर्टिफिकेट 

दरअसल हलाल एक अरबी भाषा का शब्द है और इसका मतलब होता है "स्वीकार्य". बता दें कि इस्लाम के पवित्र कुरआन शरीफ में दो अरबी शब्द हलाल और हराम का ज़िक्र मिलता है .यानी कि हलाल का अर्थ है इस्लाम धर्म के हिसाब से जो स्वीकार्य हो और हराम यानी कि जो इस्लाम में अस्वीकार्य हो. अब धार्मिक भावना के अनुसार हलाल और हराम का  दायरा बहुत बड़ा हो सकता है लेकिन आम बोल-चाल की भाषा में हलाल शब्द को सिर्फ खाने की चीज़ो  के साथ जोड़ जार देखा जाता है. यानी की इस्लाम के अनुसार हलाल शब्द को सिर्फ भोज्य पदार्थों तक ही सीमित कर दिया गया है. 


क्या होता है हलाल मांस और क्या होती है इसकी प्रक्रिया 

इस्लाम में कहा गया है कि मांस खाया जा सकता है लेकिन वो सिर्फ हलाल मांस होना चाहिए. दरअसल हलाल मांस उस मांस को कहते हैं जिसे काटने के समय जानवरों के गले पर सिर्फ एक छोटा सा कट लगाया जाता है और फिर धीरे-धीरे जानवर के शरीर से पूरा खून निकल जाता है. इस्लाम के अनुसार बिना खून वाला मांस ही हलाल मांस होता है. इस प्रक्रिया में दुकानदार को पूरी जानकारी देनी होती है कि मांस हलाल है या नहीं. जानवर को किस तरीके से काटा गया है. इस्लाम को मानाने वाले लोग हलाल मांस ही खाते हैं. 

तो वहीं जानवरों के मांस बनाने की दूसरी प्रक्रिया है झटका, जो अमूमन हिन्दू संप्रदाय के लोग इस्तेमाल करते हैं. इस प्रक्रिया के तहत जानवर की गर्दन पर एक बार में धारधार हथियार से वार किया जाता है. इस प्रक्रिया में जानवर की मौत जल्दी हो जाती है और उन्हें दर्द कम होता है. दूसरी ओर हलाल की प्रक्रिया में जानवर तड़प-तड़प कर मरता है. इस्लाम के अनुसार, हलाल मीट के लिए जानवरों का जिन्दा होना अनिवार्य शर्त है. 


कैसे मिलता है हलाल सर्टिफिकेट 

वैसे तो हलाल सर्टिफिकेट जारी करने की कोई आधिकारिक सरकारी संस्था नहीं है लेकिन इस्लाम को मानाने वाली कुछ गैर सरकारी संस्थाएं हलाल का सर्टिफिकेट देती है. जिसे इस्लाम को मानने वाले लोग मान्यता देते हैं. वैसे तो हलाल को ज्यातर लोग सिर्फ खाने से जोड़ कर देखते हैं लेकिन हर चीज पर हलाल का सर्टिफिकेट दिया जाता है. खास कर दवाइयों पर. भारत से बाहर इस्लामिक देशो में जितने भी पोडक्ट्स जाते हैं, उनके लिए ये हलाल सर्टिफिकेट जरुरी होता है. 


योगी सरकार ने क्यों बन किया हलाल प्रोडक्ट्स 

यूपी में योगी आदित्यनाथ सरकार ने हलाल प्रोडक्ट्स पर बन लगा दिया गया है. सरकार की तरफ से इसके पीछे की वजह भी बताई गयी है. दरअसल इसकी वजह है हज़रतगंज ठाणे में दर्ज़ एक प्राथमिकी. भारतीय युवा मोर्चा के एक अधिकारी शैलेन्द्र कुमार ने ये प्राथमिकी दर्ज कराई है जिसमे कहा गया है कि कुछ खास वर्ग के लोगों को खुश करने के लिए गैर-क़ानूनी तरीके से फ़र्ज़ी सर्टिफिकेट दिए जा रहे हैं.  

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