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'SC कानून बनाना चाहता है तो फिर...,' संसद को बंद कर देना चाहिए

भाजपा ने दुबे की टिप्पणी से खुद को दूर करने में देर नहीं लगाई. उनकी टिप्पणियों को व्यक्तिगत बयान बताते हुए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने स्पष्ट किया कि पार्टी इन विचारों का समर्थन या समर्थन नहीं करती है.

Calendar Last Updated : 20 April 2025, 12:56 PM IST
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Nishikant Dubey: देश में संविधान के आर्टिकल 142 को लेकर चल रहे विवाद के बीच भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने अपने टिप्पणी से विवाद को और बढ़ा दिया है. दुबे ने शनिवार को एक पोस्ट पर कमेंट शेयर करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट अगर कानून बनाना चाहता है तो फिर देश में संसद की कोई जरुरत ही नहीं.

उनकी यह टिप्पणी हाल ही में पारित वक्त (संशोधन) अधिनियम, 2025 पर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के बीच आई है. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने 'वक्फ बाय यूजर' प्रावधान सहित अधिनियम के कुछ प्रावधानों पर सवाल उठाए थे. इस मामले पर सुनवाई करते हुए अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 5 मई की तारीख दी है.  

राष्ट्रीय अध्यक्ष ने दिया बयान

भाजपा ने दुबे की टिप्पणी से खुद को दूर करने में देर नहीं लगाई. उनकी टिप्पणियों को व्यक्तिगत बयान बताते हुए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने स्पष्ट किया कि पार्टी इन विचारों का समर्थन या समर्थन नहीं करती है. नड्डा ने हिंदी में ट्वीट किया कि भारतीय जनता पार्टी ने हमेशा न्यायपालिका का सम्मान किया है और उसके आदेशों और सुझावों को सहर्ष स्वीकार किया है, क्योंकि एक पार्टी के तौर पर हम मानते हैं कि सुप्रीम कोर्ट समेत देश की सभी अदालतें हमारे लोकतंत्र का अभिन्न अंग हैं और संविधान की सुरक्षा का मजबूत स्तंभ हैं. भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि दुबे के साथ ही साथी सांसद दिनेश शर्मा और पार्टी के अन्य लोगों को भविष्य में इस तरह के बयान न देने की हिदायत दी गई है. हालांकि निशिकांत दुबे ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट अपनी सीमाओं से बाहर जा रहा है. 

उपराष्ट्रपति ने की न्यायपालिका की आलोचना

दुबे की टिप्पणी हाल ही में उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ सहित राजनीतिक नेताओं द्वारा न्यायपालिका की आलोचना के बीच आई है, जिसे उन्होंने न्यायिक अधिकार का अतिक्रमण कहा है. सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में राष्ट्रपति को उनके पास भेजे गए बिलों पर कार्रवाई करने के लिए समय सीमा तय की है. शीर्ष अदालत के निर्देशों के बाद, उपाध्यक्ष जगदीप धनखड़ ने अदालत के फैसले के खिलाफ बात की. उन्होंने राज्यसभा के प्रशिक्षुओं के एक समूह को संबोधित करते हुए पूछा कि इसे चिंताजनक घटनाक्रम बताते हुए जगदीप धनखड़ ने कहा कि भारत में कभी भी ऐसा लोकतंत्र नहीं था, जहां न्यायाधीश विधिनिर्माता, कार्यपालिका और यहां तक ​​कि सुपर संसद के रूप में कार्य करते हों.

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