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नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने पांच देशों के दौरे से लौटते ही पूरी तरह एक्शन मोड में नजर आए. गुरुवार को दिल्ली में उनकी अध्यक्षता में मंत्रिपरिषद की एक अहम और लंबी मीटिंग आयोजित की गई, जिसमें मंत्रालयों के कामकाज की विस्तृत समीक्षा की गई. एनडीए-3 सरकार के दो साल पूरे होने से पहले हुई इस बैठक ने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है.
करीब चार घंटे चली इस मीटिंग में मंत्रालयों के प्रदर्शन का विस्तार से मूल्यांकन किया गया. सूत्रों के मुताबिक, बैठक में अलग-अलग मंत्रालयों के कामकाज का रिपोर्ट कार्ड पेश किया गया, जिसमें बेहतर प्रदर्शन करने वाले टॉप-5 और कमजोर प्रदर्शन वाले बॉटम-5 मंत्रालयों की सूची भी शामिल थी. इसी के बाद मोदी कैबिनेट में बड़े फेरबदल की अटकलें तेज हो गई हैं.
बैठक में कैबिनेट सचिव राजीव गौबा और नीति आयोग के उपाध्यक्ष ने विभिन्न मंत्रालयों के कामकाज और सुधारों को लेकर प्रस्तुति दी. मंत्रालयों की रैंकिंग तय करने के लिए तय मानकों के आधार पर प्रदर्शन का मूल्यांकन किया गया. इन्हीं मानकों के आधार पर सबसे अच्छा और सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाले मंत्रालयों की सूची तैयार की गई. हालांकि, अभी तक आधिकारिक तौर पर किसी भी मंत्री का नाम सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन इस रिपोर्ट के बाद कई मंत्रियों की चिंता बढ़ गई है.
बैठक में कमजोर प्रदर्शन करने वाले मंत्रालयों को प्रधानमंत्री की ओर से साफ संदेश दिया गया. पीएम मोदी ने मंत्रालयों को अपने कामकाज में तेजी लाने और जरूरी सुधार लागू करने की हिदायत दी. प्रधानमंत्री ने कहा कि फैसले तेजी से लिए जाने चाहिए, उत्पादकता बढ़ाई जानी चाहिए और फाइलों को बिना किसी लालफीताशाही के जल्द निपटाया जाना चाहिए.
9 जून 2026 को एनडीए-3 सरकार अपने दो साल पूरे करने जा रही है. इससे पहले सभी केंद्रीय मंत्रियों को दिल्ली में मौजूद रहने के निर्देश ने भी राजनीतिक चर्चाओं को हवा दे दी है. मीटिंग में जिस तरह मंत्रालयों के प्रदर्शन का मूल्यांकन किया गया, उसके बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि प्रधानमंत्री जल्द ही अपनी टीम में बड़ा बदलाव कर सकते हैं. माना जा रहा है कि कमजोर प्रदर्शन वाले मंत्रियों के विभाग बदले जा सकते हैं या उन्हें कैबिनेट से बाहर भी किया जा सकता है. वहीं, बेहतर प्रदर्शन करने वाले युवा चेहरों को बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है.
मीटिंग में कृषि, श्रम, सड़क परिवहन, कॉर्पोरेट मामलों, विदेश, वाणिज्य और ऊर्जा मंत्रालय समेत कई विभागों ने पिछले दो वर्षों के कामकाज का ब्योरा पेश किया. प्रधानमंत्री मोदी ने मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों से कहा कि सरकार का उद्देश्य लोगों की जिंदगी में अनावश्यक दखल देना नहीं, बल्कि जरूरत पड़ने पर उनकी मदद करना है. उन्होंने कहा कि हर सुधार और नई पहल का अंतिम लक्ष्य आम लोगों के जीवन को आसान बनाना होना चाहिए. पीएम मोदी ने यह भी दोहराया कि विकसित भारत 2047 केवल एक राजनीतिक नारा नहीं, बल्कि सरकार की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता है.